0 खदान दुर्घटना में ही मिलेगी नौकरी, श्रमिक संगठन का विरोध

कोरबा। नईदुनिया प्रतिनिधि

कोलकर्मियों के आश्रितों की नियुक्ति को लेकर प्रबंधन ने अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। हाईकोर्ट ने दो माह का वक्त दिया, पर एक माह बीत जाने के बाद भी अंतिम निर्णय नहीं हो सका। हाईकोर्ट के आदेश के बाद हड़कंप मचा हुआ है। प्रबंधन का तर्क है कि सिर्फ खदान दुर्घटना में नौकरी दी जाएगी, पर यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि पहले से जारी सुविधा में किसी तरह की कटौती स्वीकार नहीं होगी। इसी तरह शिक्षा के अनुसार आश्रित को नौकरी दिए जाने का प्रावधान है, पर कंपनी केटेगरी वन जनरल मजदूर में काम सौंप रही है।

एसईसीएल समेत सीआइएल की अन्य अनुषांगिक कंपनी में कार्यरत कर्मियों के विभिन्ना कारणों से दिवंगत होने पर आश्रितों को नौकरी देने का प्रावधान बना हुआ है। प्रबंधन इसमें संशोधन करने के लिए लंबे समय से प्रयासरत है, पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका। वेज रिवीजन के दौरान इस प्रस्ताव को रखा गया था, पर प्रबंधन को श्रमिक संघ के विरोध झेलना पड़ा और मामला लटक गया। आठवें वेज रिवीजन में तय किया गया था कि आश्रितों को उनकी शिक्षा के आधार पर नौकरी दी जाएगी। बावजूद कोल कंपनियां इसे लागू नहीं कर रही। इससे श्रमिकों में असंतोष व्याप्त है और अब संशोधन कर सिर्फ खदान दुर्घटना में नौकरी देने का प्रस्ताव रखे जाने से आक्रोश बढ़ते जा रहा है। डब्ल्यूसीएल के बीटेक किए एक कर्मी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और मामला हाईकोर्ट नागपुर खंडपीठ में विचाराधीन है। इसी तरह कुसमुंडा खदान में भू-विस्थापित के रूप में नौकरी ली अंकिता पांडेय डॉक्टर हैं, पर उसे कंपनी ने केटेगरी वन में रखा है। हाईकोर्ट ने दो माह का वक्त प्रबंधन को दिया था, पर प्रबंधन ने श्रमिक संघ प्रतिनिधियों से चर्चा कर अंतिम निर्णय लेकर अवगत कराने कहा। बताया जा रहा है कि एक माह का वक्त बीत चुका है और अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। न्यायालय में प्रबंधन को अपना पक्ष रखना है, इसलिए जल्द बैठक कर निर्णय लेने का प्रयास शुरू कर दिया गया है। संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही आश्रितों को नौकरी के मसले पर प्रबंधन की ओर से उचित निर्णय लिया जाएगा।

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आज होगी स्टैंडराइजेशन कमेटी की बैठक

कोलकर्मियों के आश्रितों को 9.3.0, 9.4.0 तथा 9.5.0 के तहत नौकरी दी जाती है। इसमें संशोधन का प्रस्ताव प्रबंधन ने कई बार रखा, पर श्रमिक संघ प्रतिनिधियों के विरोध की वजह से सफलता नहीं मिल सकी। बावजूद कुछ कंपनियों ने इन नियमों के तहत अनुकंपा नियुक्ति पर रोक लगा दी है। इससे कर्मियों के परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे निपटने के लिए स्टैंडराइजेशन कमेटी की बैठक 11 नवंबर को सीआइएल मुख्यालय कोलकाता में आयोजित की गई है।

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एनसीएल सीएमडी सिन्हा करेंगे अध्यक्षता

कमेटी के चेयरमैन व एनसीएल के सीएमडी पीके सिन्हा की अध्यक्षता में बैठक होगी। इसमें सीआइएल निदेशक कार्मिक आरपी श्रीवास्तव, डीपी एमसीएल एलएन मिश्रा, डीपी एसईसीएल डॉ. आरएस झा, डीपी सीसीएल आरएस महापात्रो, डीपी बीसीसीएल आरएस महापात्रा, डीपी ईसीएल विनय रंजन व अन्य आला अफसर तथा यूनियन की ओर से बीएमएस से डॉ. बीके राय, वाईएन सिंह, एचएमएस नाथूलाल पांडेय, एसके पांडेय, एटक से रमेंद्र कुमार, सीटू से डीडी रामानंदन उपस्थित रहेंगे।

कोल प्रबंधन आश्रितों को नौकरी देने के प्रस्ताव पर संशोधन करने का प्रयास कर रही है, ताकि पुराने नियम के तहत नौकरी न मिल सके। इसका विरोध किया जाएगा। समझौता के मुताबिक आश्रितों को नौकरी पहले की तरह जारी रहेगी। शैक्षणिक योग्यता के आधार पर तय प्रावधान के मुताबिक कर्मियों के आश्रितों को नौकरी देना होगा ना की जनरल मजदूर के रुप में। अफसर के आश्रितों को सीधे क्लर्क में भर्ती होती है।

- नाथूलाल पांडेय, सदस्य, स्टैंडराइजेशन कमेटी