रायपुर। निलंबित डिप्टी जेलर वर्षा डोंगरे के पक्ष में सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश भी उतर आए हैं। उन्होंने वर्षा के मामले में मुख्यमंत्री के नाम एक खुला पत्र लिखा है, जो सोशल मीडिया पर जमकर ट्रेंड कर रहा है।

अग्निवेश ने लिखा है- 'आदरणीय रमन सिंह जी, मुझे आपको यह पत्र लिखने की प्रेरणा सहायक जेलर वर्षा डोंगरे के उठाए गए मुद्दे और फिर उनके साथ किए जा रहे छत्तीसगढ़ सरकार के व्यवहार से मिली है। वर्षा डोंगरे जगदलपुर जेल में भी काम कर चुकी हैं। वहां वर्षा ने पुलिस द्वारा नाबालिग लड़कियों को जेल मंे बंद करते देखा। देखा कि इन छोटी-छोटी आदिवासी लड़कियों के शरीर पर बिजली से जलाए जाने के निशान थे। एक महिला जेल अधिकारी हम सबका ध्यान इस भयानक स्थिति की तरफ दिला रही है तो हमें उस महिला अधिकारी को धन्यवाद देना चाहिए और इस बुराई को समाप्त करने के लिए कदम उठाना चाहिए। दुख की बात है कि उस अफसर की हिम्मत बढ़ाने के बजाय उसे निलंबित किया गया और आपकी सरकार के गृहमंत्री ने उस पर शहरी माओवादी होने की टिप्पणी भी कर दी। मुझे याद है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जब सलवा जुड़ूम के मामले में आदेश दिया गया था, तब भी छत्तीसगढ़ के तत्कालीन गृहमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के जज के माओवादी समर्थक होने का बयान दिया था। सुकमा के दलित जज प्रभाकर ग्वाल को भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने पर बर्खास्त कर दिया गया। इस तरह हम अगर हरेक आलोचक को माओवादी कहकर खारिज करते जाएंगे तो फिर सरकार को यह कैसे पता चलेगा कि क्या गलतियां हो रही हैं? हम मानते हैं जहां अन्याय है, वहां शांति नहीं हो सकती, इसलिए समझ लीजिए कि जो न्याय की बात कर रहा है वह शांति लाने का रास्ता बता रहा है।"

अग्निवेश ने यह भी लिखा कि सत्ता एक आने-जाने वाली चीज है। आज आप सत्ता में हैं, कल दूसरा कोई होगा। तब अगर कोई आपको माओवादी समर्थक कह कर बदनाम करेगा तो आपको कैसा महसूस होगा, सोचिएगा? आपसे अपील करता हूं कि इस मामले में हस्तक्षेप करें और वर्षा डोंगरे का निलंबन रद्द कर उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर एक जांच दल का गठन करें।

सीएम टाल गए सवाल

वर्षा के समर्थन में नेशनल अलायंस ऑफ पीपल्स मूवमेंट ने भी राज्यपाल को पत्र लिखा है। इस पत्र में मेधा पाटकर, अरूणा रॉय, बिनायक सेन, कविता श्रीवास्तव सहित देश-विदेश के कई जानेमाने सामाजिक कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण भी इस मसले पर आवाज उठा चुके हैं। प्रशांत के ट्वीट पर पूछे गए सवाल को मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह यह कहकर टाल गए कि ऐसा होता रहता है।