अंबिकापुर/बिहारपुर। सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर थानांतर्गत ग्राम नवडीहा में मासूम भाई-बहन का संदिग्ध परिस्थितियों में कुएं में शव मिलने के मामले का खुलासा हो गया है। मां ने ही दोनों बच्चे को कुएं में फेंक मार डाला था। मायके जाने के दौरान पिता के साथ पुत्र के घर वापस लौट आने के कारण मायके नहीं जा पाने से आक्रोशित होकर महिला ने वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने हत्या के आरोप में मां को गिरफ्तार कर लिया है।

चांदनी थाना प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र सिंह ने बताया कि घटना दिनांक 28 अगस्त 2017 की सुबह ग्राम नवडीहा में जवाहिर यादव के बच्चे लवकेश यादव 4 वर्ष व कुमारी गीता 15 माह का शव कुएं में मिला था। घटना के बाद से मृत बच्चों की मां देवमति यादव घर से फरार हो गई थी।

संदिग्ध परिस्थितियों में शव बरामद होने तथा मां के फरार हो जाने के कारण दोनों बच्चों को कुएं में फेंक हत्या करने का शक था। सूरजपुर के पुलिस अधीक्षक आरपी साय व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एसआर भगत के निर्देश पर एसडीओपी धु्रवेश जायसवाल के मार्गदर्शन में चांदनी थाना व मोहरसोप पुलिस चौकी की टीम मामले की जांच-पड़ताल में लगी हुई थी।

पुलिस की पहली प्राथमिकता लापता मां देवमति यादव को खोजना था। उसकी पतासाजी के लिए मुखबिरों का भी जाल बिछाया गया था। पता-तलाश के दौरान मध्यप्रदेश के बभनी पहरी से उसे पकड़ा गया। चूंकि मां के लापता होने की शिकायत परिजनों द्वारा दर्ज कराई गई थी, इसलिए पहले उसकी बरामदगी कर परिजनों के सुपुर्द किया गया, फिर उससे पूछताछ शुरू की गई।

जिसमें कई सवालों का वह सही-सही जवाब देने से बचती रही। गोलमोल जवाब देने के कारण पुलिस को पूरा यकिन हो गया था कि वारदात को मां ने ही अंजाम दिया होगा। घटना से जुड़े जांच के बिंदू तय कर जब नए सिरे से पूछताछ शुरू की गई तो महिला टूट गई और उसने दोनों बच्चे को कुएं में फेंककर हत्या करना स्वीकार कर लिया। महिला की स्वीकारोक्ति के बाद पुलिस ने उसे हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।

इस अंधे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में चांदनी थाना प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र सिंह, प्रधान आरक्षक सुरेंद्र सिंह, आरक्षक अकरम मोहम्मद, महिला आरक्षक प्रमिला तिग्गा, मोहरसोप चौकी से उपनिरीक्षक हिम्मत सिंह शेखावत, सहायक उपनिरीक्षक चंद्रेश्वर राम, आरक्षक छोटेलाल कुजूर, खेलन सिंह, सहायक आरक्षक कमलेश गुर्जर की सक्रिय सहभागिता रही।

बच्चों पर निकाला गुस्सा

पुलिस पूछताछ में देवमति यादव ने बताया कि घटना दिवस 27 अगस्त की सुबह वह दोनों बच्चों को साथ लेकर मायके जाने के लिए निकली थी। वह बस स्टैंड पहुंचकर वाहन का इंतजार कर रही थी। उसी दौरान उनके पति जवाहिर यादव साइकिल से उन्हें छोड़ने पहुंचे। पिता को देखकर पुत्र लवकेश यादव मां के साथ जाने से मना करने लगा। वह मां का हाथ छुड़ाकर पिता के पास चला गया और घर ले जाने की जिद करने लगा। पुत्र के पिता के साथ घर वापस लौट जाने के कारण महिला भी मायके नहीं जा सकी और दूधमुंही बेटी को गोद में लेकर वह भी ससुराल वापस लौट आई। बेटे के कारण मायके नहीं जा पाने का गुस्सा तथा कथित रूप से ससुराल में लोगों द्वारा उसे पसंद नहीं करने से नाराज होकर ही उसने वारदात को अंजाम दिया था।

पिता के लौटने से पहले फेंक दिया था कुंए में

घटना दिवस को मृत बच्चों का पिता जवाहिर यादव नवडीहा के साप्ताहिक बाजार गया था। पुराने घर में दोनों बच्चों के साथ महिला मौजूद थी। इसी बीच गांव की ही एक पंडो महिला उससे मुलाकात करने आई थी। उस दौरान देवमति यादव ने बच्चों के कारण मायके नहीं जा पाने तथा ससुराल वालों द्वारा पसंद नहीं करने का जिक्र कर पंडो महिला से कहा था कि वह बच्चों को कुएं में फेंक खुद भी छलांग लगा देगी।

पंडो महिला ने उसे ऐसा करने से मना किया था और घर लौट गई थी। रात 11 बजे जब महिला का पति बाजार से घर लौटा और बच्चों के संबंध में पूछताछ की तो महिला ने बताया था कि बच्चे घर में ही कहीं सो रहे होगें। चूंकि इनका दो घर है, साथ ही पड़ोस में दूसरे रिश्तेदार भी रहते हैं, इसलिए पति को भी ज्यादा शक नहीं हुआ। वह सोचा कि बच्चे कहीं सो रहे होंगे और वह भी जाकर सो गया था। अगले दिन सुबह दोनों की लाश मिली थी। पति के पुराने घर से नए घर में चले जाने के बाद बच्चों की मां रात के अंधेरे में ही घर छोड़कर फरार हो गई थी।