अम्बिकापुर। शहर के कंपनी बाजार में कड़कड़ाती ठंड में रात गुजारने वाले जरूरतमंदों को शहर की कुछ महिलाओं ने भरपेट भोजन कराने का बीड़ा उठाया है।

तीन वर्षों से लगातार सप्ताह में 3 दिन नियमित गर्म भोजन कराने का पुनीत कार्य इन समाजसेवी महिलाओं के द्वारा किया जा रहा है। शहर के कुछ लोगों से भोजन की व्यवस्था कर ये महिलाएं गरमा-गर्म भोजन लेकर कंपनी बाजार पहुंच जाती हैं और यहां रात गुजार रहे जरूरतमंदों को भोजन परोसकर खिलाने का काम करती हैं।

यहां रहने वाले जरूरतमंद दिन भर शहर में भीख मांग कर गुजारा करते हैं। कुछ ऐसे भी लोग हैं जो शारीरिक रूप से असहाय हैं और शहर में मजदूरी भी नहीं कर पाते। ऐसे लोगों के लिए शहर की महिलाएं भोजन का प्रबंध कर सामाजिक सेवा की मिसाल कायम कर रही हैं। महिलाओं ने इसका नाम 'रात्रि कालीन नि:शुल्क भोजन" दिया है।

तीन वर्ष पूर्व सामाजिक कार्यकर्ता वंदना दत्ता ने कंपनी बाजार जा कर बेहाल पड़े इन लोगों की हालत देखी तो उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने अपनी साथी महिलाओं को इसकी जानकारी दी और सभी सहर्ष तैयार हुए। पहले सप्ताह में एक दिन गर्म और पौष्टिक भोजन खिलाने का काम शुरू किया।

धीरे-धीरे कई महिलाएं इस रात्रि कालीन भोजन में जुड़ गई और शहर के कुछ होटल संचालकों ने भी मदद देनी शुरू की सप्ताह में एकदिन का भोजन अब तीन दिन कराने लगी हैं। रात्रिकालीन भोजन समिति की संयोजक वंदना दत्ता का कहना है कि जिनके लिए कोई नहीं सोचता उसके लिए यदि हम सप्ताह में कुछ दिन भी भोजन उपलब्ध करा दें तो यह हमारे लिए गर्व की बात होती है।

धीरे धीरे अब शहर के जनप्रतिनिधि भी इन जरूरतमंदों को भोजन कराने में सहयोग करने लगे हैं। वंदना का कहना है यहां रहने वाले लोग जो शारीरिक रूप से अक्षम भी हैं। वे दान में मिले अनाज को स्वयं पकाकर भी नहीं खा सकते। उनकी स्थिति बेहद चिंताजनक है, किंतु तीन वर्ष से उनमें काफी बदलाव आया है। पौष्टिक और साफ सुथरा भोजन अब इनके चेहरे पर रौनक लाने का काम कर रहा है।

हमारी कोशिश है कि हम इसे सप्ताह में सातों दिन संचालित कर सकें। इसके लिए हमने शहर के जनप्रतिनिधि व सामाजिक सेवा करने वालों से चर्चा भी कर चुके हैं। इस पुनीत कार्य में शहर की डॉली भल्ला, रेखा इंगोले, सरिता भाटिया, तनुश्री मिश्रा, अनुभा डबराल, किरण भाटिया, हिना रिजवी, चैती अग्रवाल, नीलू अरोरा, संगीता सिंह सहित अन्य महिलाएं हमेशा सक्रिय रहतीं हैं।

हर साल देते हैं गर्म कपड़े

सामाजिक कार्य करने वाली इन महिलाओं के द्वारा हर वर्ष जरूरतमदों को साल स्वेटर कंबल जैसे गर्म वस्त्र दिए जाते हैं। कंपनी बाजार में सेड के नीचे कड़कड़ाती ठंड में रात गुजारने वाले इन जरुरतमंद लोंगो की सुध लेने वाला पहले कोई नहीं था, पर अब ये महिलाएं इन जरूरतमंदों के लिए सब कुछ हैं।