अंबिकापुर। मैनपाट की तराई में बसे धरमजयगढ़ वन मंडल के कापू रेंज के कई गांवों के लोग हाथियों के स्वच्छंद विचरण से रतजगा करने को मजबूर हैं। दिन में जंगल में जमे रहने वाले हाथी शाम ढलते ही आबादी क्षेत्र की ओर रूख करते हैं। रविवार की रात हाथियों ने कापू वन परिक्षेत्र के बरडांड़, डूमरभवना में कुछ कच्चे मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

हाथियों के स्वच्छंद विचरण को देखते हुए प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों ने मैनपाट के केसरा में शरण ली थी। वन विभाग द्वारा गज प्रभावितों के लिए सारी आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित करा दी गई थी ताकि सर्द रात में उन्हें परेशान न होना पड़े। सारी रात गांव वालों ने अलाव जलाकर रतजगा किया।

उल्लेखनीय है कि एक हफ्ते पहले 11 हाथियों के दल ने मैनपाट से लगे धरमजयगढ़ वनमंडल के कापू वन परिक्षेत्र में प्रवेश किया है। इसी रास्ते से हाथियों का दल मैनपाट में घुसता रहा है। हाथियों के ट्रेक पर इस बार वन विभाग का एलिफेंट प्रूफ ट्रेंच भारी पड़ रहा है, क्योंकि लगभग 2200 मीटर क्षेत्र में खुदाई कर देने के कारण हाथी मैनपाट की ओर रूख नहीं कर पा रहे हैं।

पिछले लगभग एक हफ्ते से 11 हाथियों का दल मैनपाट की तराई के जंगल में ही जमा हुआ है। वन अधिकारियों के मुताबिक मैनपाट के केसरा बस्ती के नीचे कापू वन परिक्षेत्र का घना जंगल है। मैनपाट के मेहता प्वाइंट से नीचे इस स्थान पर धरमजयगढ़ वनमंडल के वन कर्मचारियों का आवास और ग्रामीणों की बसाहट भी है।

बरडांड़, डूमरभवना के इस क्षेत्र में हाथी लगातार विचरण कर रहे हैं। रविवार की रात हाथियों ने आबादी क्षेत्र की ओर रूख किया था। जंगल किनारे कुछ कच्चे मकानों को हाथियों ने क्षतिग्रस्त भी कर दिया था। हाथियों के भय से गांव वाले मैनपाट के केसरा में शरण ले ली थी।

वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों द्वारा प्रभावित परिवारों के लिए अलाव की व्यवस्था की गई थी। पर्याप्त रौशनी के इंतजाम किए गए थे, ताकि हाथियों से जनहानि की कोई घटना न हो जाए। एसडीओ वन चूड़ामणि सिंह ने बताया कि मैनपाट वन परिक्षेत्र में हाथियों के प्रवेश की संभावना कम है।

उसके बावजूद हाथियों की निगरानी के लिए चार अलग-अलग दल बनाए गए हैं। कापू वन परिक्षेत्र में जब हाथियों का मूवमेंट होता है तो नजदीक के गांव के कुछ परिवार मैनपाट के सीमावर्ती गांवों में सुरक्षित तरीके से शरण ले लेते हैं।

वन विभाग की ओर से सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती है और हाथियों से बचाव के लिए सारे संसाधन भी उपलब्ध कराए जाते हैं। उन्होंने बताया कि उदयपुर क्षेत्र के दोनों हाथी भी लखनपुर रेंज के डांड़केसरा के नजदीक जंगल में हैं।

कापू रेंज में जमे 11 हाथियों के दल से लखनपुर रेंज के दोनों हाथियों की दूरी लगभग दो किमी होगी। इन दोनों हाथियों के भी दल से मिल जाने की पूरी संभावना है। उन्होंने बताया कि मैनपाट क्षेत्र में हाथियों ने अभी तक किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है।