अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

कॉलेज मैदान के वॉकिंग ट्रैक के किनारे चिकित्सक द्वारा कराए जा रहे निर्माण को लेकर रविवार को शिकायतों की झड़ी लगी रही। राजस्व व निगम अमले द्वारा मौके पर पहुंचने से पहले ही खोदे गए गड्ढे को पाट दिया गया। अधिकारियों को शिकायत मिली थी कि चिकित्सक द्वारा कॉलेज मैदान के वॉकिंग ट्रैक के किनारे सेप्टिक टैंक का निर्माण करा रहा है। बाद में राजस्व व निगम का अमला पहुंचा तो जानकारी दी गई कि वाटर हार्वेस्टिंग तैयार की जा रही थी, लेकिन स्वयं की जमीन पर छोड़ कॉलेज मैदान में वाटर हार्वेस्टिंग निर्माण के दावे को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। मौके पर खोदाई से स्पष्ट होगा कि वाकई वहां वाटर हार्वेस्टिंग बन रहा था या फिर सेप्टिक टैंक।

कॉलेज मैदान के किनारे प्रशासन द्वारा बड़ी राशि खर्च कर वॉकिंग ट्रैक का निर्माण कराया गया है। यहां सुबह-शाम सैकड़ों की संख्या में लोग पैदल भ्रमण के लिए पहुंचते हैं। वॉकिंग ट्रैक से लगे औद्योगिक प्रक्षेत्र इलाके में आवासीय मकान भी है, जिनका पीछे का हिस्सा कॉलेज मैदान से जुड़ा है। शनिवार शासकीय अवकाश को देखते हुए एक मकान के पीछे वॉकिंग ट्रैक के किनारे गड्ढा खोदवाया जा रहा था। तेजी से काम चल रहा था। कई मजदूर लगे हुए थे। सुबह-शाम पैदल भ्रमण करने वालों को लगा कि वहां सेप्टिक टैंक का निर्माण कराया जा रहा है, जो नियम विरुद्घ है। भविष्य में पैदल भ्रमण में लोगों को परेशानी होगी, इसलिए मौखिक शिकायत सुबह से ही शुरू हो गई। दोपहर बाद छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के विभाग संयोजक उपेंद्र यादव के नेतृत्व में छात्रों ने एसडीएम को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा और वाट्सएप के जरिए निर्माण की तस्वीर भी भेजी। अभाविप द्वारा आरोप लगाया कि कॉलेज मैदान में लोगों द्वारा सेप्टिक टैंक व वाटर हार्वेस्टिंग टैंक बनवाने के नाम पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। मैदान शुरू से ही अतिक्रमण का शिकार है। यदि अब भी इसपर रोक नहीं लगी तो सोमवार को छात्र संगठन अभाविप उग्र आंदोलन करेगा।

शिकायत पर एसडीएम के निर्देशानुसार नायब तहसीलदार व निगम कर्मचारी पुलिस बल को साथ लेकर तत्काल मौके पर पहुंचे। इसी बीच एक चिकित्सक वहां पहुंच गए। उन्हीं का मकान उक्त निर्माण स्थल के नजदीक था। उन्होंने दावा किया कि सेप्टिक टैंक का निर्माण नहीं हो रहा था, बल्कि वाटर हार्वेस्टिंग के लिए गड्ढा खोदा जा रहा था। इसके लिए निगम के निर्वाचित जनप्रतिनिधि से चर्चा भी हुई थी, जिन्होंने वाटर हार्वेस्टिंग की सफल तकनीक को लेकर जानकारी भी दी थी। काम अब बंद करा दिया गया है। उक्त स्थल को मिट्टी से पाट दिया गया था। मौके पर पहुंचे जिम्मेदार अधिकारियों ने यह जानने का प्रयास नहीं किया कि यदि वाटर हार्वेस्टिंग का ही निर्माण चल रहा था तो कॉलेज की जमीन पर क्यों। नियमानुसार स्वयं की जमीन पर ही वह निर्माण कराया जाना चाहिए था। मौके पर मौजूद लोगों ने प्रशासन व निगम अमले से मांग की है कि सच्चाई पता करने उक्त स्थल की नए सिरे से खोदाई कराई जानी चाहिए, ताकि स्पष्ट हो सके कि वास्तव में वहां क्या बनाया जा रहा था। बहरहाल वॉकिंग ट्रैक के किनारे फेंके जाने वाले कचरे, कॉलेज मैदान में होने वाली शराबखोरी को लेकर पैदल भ्रमण करने वाले भी परेशान हैं।