0 अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी का फैसला, लगभग सात वर्ष पूर्व हुई थी घटना

0 अदालत ने कहा- अपराध से माता-पिता को हुई क्षति की प्रतिपूर्ति धन से नहीं हो सकती

0 राज्य सरकार को एक लाख रुपये परिजनों को अपील अवधि पश्चात्‌ देने आदेश

अंबिकापुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

9 वर्षीया बालिका को भगा ले जा अनाचार पश्चात गला दबा हत्या कर दिए जाने के प्रकरण में अपर सत्र न्यायाधीश(फास्ट ट्रेक कोर्ट) सुनीता टोप्पो की अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है। प्रकरण में अदालत ने राज्य सरकार को आदेशित किया है कि अपील अवधि पश्चात मृतिका के परिजनों को एक लाख रुपये प्रतिपूर्ति धन के रूप में उपलब्ध कराए।

मिली जानकारी के मुताबिक सीतापुर थाना क्षेत्र के एक गांव की 9 वर्षीया बालिका परिजनों व गांव वालों के अलावा आरोपी पखरीखार सूर निवासी रामअवतार पिता रामकुमार उरांव 29 वर्ष के साथ घटना दिवस 27 मई 2011 को विवाह समारोह में शामिल होने के लिए नजदीक के गांव में गई हुई थी। घर वापसी के दौरान जब बालिका की खोजबीन की गई तो वह कहीं नजर नहीं आई। पूछताछ करने पर पता चला कि आरोपी रामअवतार पिता रामकुमार उरांव के साथ उसे आखिरी बार कई लोगों ने देखा था। खोजबीन के बाद भी जब उसका कुछ पता नहीं चल सका तो परिजनों ने रामअवतार के घर जाकर उससे पूछताछ शुरू की। पीड़िता को खोजने जाने साइकिल निकालने के बहाने वह भाग निकला। इसी बीच खबर मिली कि उसी गांव के खेत में बालिका का संदिग्ध परिस्थितियों में शव पड़ा हुआ है। परिजनों ने पुलिस की मौजूदगी में उसकी पहचान सुनिश्चित की। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी रामअवतार पिता रामकुमार उरांव द्वारा पीड़िता को बहला-फुसला खेत में ले जा अनाचार पश्चात गला दबाकर उसकी हत्या कर दी गई थी। मामले में सीतापुर पुलिस ने अपहरण, अनाचार व हत्या के आरोप में आरोपी को गिरफ्तार कर प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया था। प्रकरण के सारे तथ्यों की सुनवाई व पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश(फास्ट ट्रेक कोर्ट) सुनीता टोप्पो की अदालत ने आरोपी को अपहरण, अनाचार व हत्या का दोषी पाया। गुरूवार को मामले में अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी को धारा 363 के तहत पांच वर्ष कारावास व 500 रुपये अर्थदंड, धारा 366 के तहत 10 वर्ष कारावास व 500 रुपये अर्थदंड, धारा 376(1) के तहत आजीवन कारावास व अर्थदंड तथा धारा 302 के तहत भी आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। इस पूरे प्रकरण में अदालत ने कहा है कि इस अपराध से माता-पिता को हुई क्षति की प्रतिपूर्ति धन के रूप में नहीं हो सकती, लेकिन राज्य सरकार को अदालत ने आदेशित किया है कि प्रकरण की अपील अवधि पश्चात मृतिका के परिजनों को एक लाख रुपये अदा किया जाए।