0 अभाविप ने कुलसचिव चेंबर के बाहर धरना देकर की नारेबाजी

0 मूल्यांकन प्रणाली पर भी उठाए सवाल, कुलसचिव को सौंपा ज्ञापन

0 दर्जनों विद्यार्थियों को मिला शून्य अंक, जताई नाराजगी

अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

सरगुजा विवि द्वारा बीएससी द्वितीय व बीकाम प्रथम वर्ष के दर्जनों विद्यार्थियों को कई विषयों में शून्य देने के साथ ही अनुपस्थित व अनुत्तीर्ण घोषित करने पर छात्र संगठन अभाविप ने विवि की मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। कई विद्यार्थी ऐसे भी सामने आए हैं, जिन्हें किसी विषय की परीक्षा में अनुपस्थित घोषित कर दिया गया है और संबंधित केंद्र से विद्यार्थी द्वारा उपस्थिति का प्रमाण प्रस्तुत करने पर विवि द्वारा अंक जारी कर दिया। इस अव्यवस्था के खिलाफ शुक्रवार को अभाविप ने सरगुजा विवि में जोरदार प्रदर्शन किया। चेंबर के बाहर धरना व नारेबाजी को देखते हुए कुलसचिव बाहर निकले और प्रदर्शनकारियों से मांगों को लेकर चर्चा की। अभाविप की मांगों पर उचित निर्णय के आश्वासन पर प्रदर्शन समाप्त किया गया।

सरगुजा विवि की मूल्यांकन प्रणाली को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इस वर्ष शुरू से ही यह शिकायत सामने आ रही है कि मेधावी विद्यार्थी जो कई विषयों में अच्छे अंक प्राप्त किए हैं, उन्हें एक-दो विषयों में शून्य अंक घोषित कर दिया गया है। परीक्षा में शामिल विद्यार्थियों को अनुपस्थित दर्शाने की स्थिति में संबंधित परीक्षा केंद्र से संबंधित विषय की परीक्षा में उपस्थिति का प्रमाण प्रस्तुत कर दिए जाने पर विवि द्वारा संबंधित विषय में न सिर्फ विद्यार्थी को परीक्षा में उपस्थित बता दिया गया, बल्कि उसे अंक भी दिए गए। लगातार सामने आ रही इन समस्याओं को देखते हुए अभाविप के प्रांत विवि प्रमुख अंकित जायसवाल व विभाग संयोजक निशांत गुप्ता के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अभाविप के पदाधिकारी, कार्यकर्ता व विद्यार्थी शुक्रवार को विवि पहुंच गए। परिसर में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारी सीधे कुलसचिव चेंबर के बाहर धरने पर बैठ गए। नारेबाजी सुनकर कुलसचिव विनोद एक्का चेंबर से बाहर निकले और सभी विद्यार्थियों के बीच पहुंचकर उनकी एक-एक मांगों को लेकर चर्चा की और आश्वस्त किया कि विवि प्रबंधन विद्यार्थी हितों को लेकर गंभीर है। विद्यार्थियों की ओर से जो भी समस्या बताई जा रही है, उनका परीक्षण करा समस्याओं का निराकरण कराया जाएगा। अभाविप ने इंजीनियरिंग कालेज में सामग्री क्रय व कौशल विकास के नाम पर अनियमितता की भी लिखित शिकायत की और आरोप लगाया कि दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने सूचना के अधिकार से भी जानकारी नहीं दी जा रही है। कुलसचिव ने बताया कि इंजीनियरिंग कालेज की जांच के लिए विवि की ओर से कमेटी का गठन किया गया है। प्रदर्शन में शुभम सिंह भदौरिया, अश्विनी चौबे, उपेंद्र यादव, निखिल मरावी, राकेश कश्यप, नीतीश पाण्डेय, प्रिंस तिवारी, कमलेश घोष, शुभम प्रजापति, चंदन मिश्रा, केशव यादव, किरण पाल, जया चौहान, सेवंती साहू, नेहा राजवाड़े, पवन विश्वकर्मा आदि शामिल थे।

अनुपस्थित बता बाद में नंबर भी दे रहे

विवि द्वारा कई विद्यार्थियों को कई विषयों की परीक्षा में अनुपस्थित बता दिया गया था, जबकि वे उपस्थित थे। ऐसे विद्यार्थी जब संबंधित परीक्षा केंद्र पहुंचे और अपनी उपस्थिति का प्रमाण लेकर विवि में प्रस्तुत किया तो उसे उपस्थित मान लिया गया और विवि द्वारा बकायदा संबंधित विषय में उक्त विद्यार्थी को अंक भी दिए गए। कई विद्यार्थियों का आरोप था कि उन्हें कई विषयों में शून्य अंक मिला है। कई कालेज के दर्जनों विद्यार्थी प्रदर्शन में शामिल हुए। उनका कहना था कि परीक्षा में सवालों का सही जवाब देने के बावजूद उन्हें शून्य व दो-तीन अंक मिले हैं। ऐसे परीक्षार्थियों का कहना था कि व्यक्तिगत रूप से विवि पहुंचने पर उन समस्याओं का निराकरण नहीं हो रहा है।

कुलसचिव ने दिया आश्वासन

कुलसचिव विनोद एक्का ने प्रदर्शनकारियों से एक-एक मांग को लेकर चर्चा की। उन्हें आश्वस्त किया कि जिन विद्यार्थियों को मूल्यांकन को लेकर संदेह है, वे सामूहिक रूप से आवेदन प्रस्तुत करें। इस आवेदन पर संबंधित विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं का पुनः परीक्षण कर दिया जाएगा। पूरक परीक्षा से पहले पुनर्मूल्यांकन का परिणाम घोषित करने की मांग पर उन्होंने कहा कि प्रयास जारी है। बीएससी द्वितीय व बीकाम प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम में अधिकतर छात्रों को शून्य अंक देने व अनुत्तीर्ण कर दिए जाने की शिकायत पर कुलसचिव ने कहा कि कई विषयों में संभव है कि विद्यार्थियों को शून्य अंक मिले, फिर भी शिकायत आएगी तो उसकी जांच करा ली जाएगी। प्रायोगिक परीक्षा में शामिल होने के बावजूद अनुपस्थित होने की समस्या के निराकरण का आश्वासन भी उन्होंने दिया।

वापस किया जाएगा शुल्क

सरगुजा विवि द्वारा शिक्षा सत्र 2018-19 में ऑनलाइन प्रवेश की व्यवस्था बनाई गई थी, जिसके तहत विद्यार्थियों को विवि में पंजीयन कराना अनिवार्य था। पंजीयन के दौरान ही 110 रुपये का शुल्क लिया जा रहा था। छात्र संगठन अभाविप का आरोप है कि हजारों विद्यार्थी ऐसे हैं, जिन्होंने अपना पंजीयन तो कराया लेकिन प्रवेश नहीं लिया है। ऐसे विद्यार्थियों का शुल्क वापस किया जाना चाहिए। कुलसचिव विनोद एक्का ने आश्वस्त किया कि इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा व जिन विद्यार्थियों ने प्रवेश नहीं लिया है, उनका पंजीयन के दौरान लिया गया शुल्क वापस किया जाएगा। इस विषय को कार्य परिषद की बैठक में भी रखा जाएगा।