अंबिकापुर। छत्तीगसढ़ में टिकट बंटवारे के आखिरी दौर में पहुंची भाजपा को सरगुजा संभाग में सबसे ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां पार्टी की अंतरकलह के साथ ही हारे नेताओं की दावेदारी ने आला नेताओं की मुश्किलें बढ़ा दी है। सरगुजा संभाग में बढ़त की उम्मीद लगाई भाजपा के लिए सर्वसम्मति बनाते हुए प्रत्याशी चयन मुश्किलों भरा हो सकता है।

अंतरकलह सबसे बड़ी चुनौती

2013 के विधानसभा चुनाव में सरगुजा संभाग की 14 सीटों में भाजपा के खाते में सात सीटें आई थीं, जिनमें कोरिया एवं जशपुर जिले की सभी तीन-तीन सीट एवं अविभाजित सरगुजा की आठ में से एकमात्र प्रतापपुर सीट शामिल है। जीती हुई सीटों पर वर्तमान विधायकों के एंटी इंकम्बेंसी एवं हारी हुई सीटों पर नए या पुराने चेहरे पर दांव लगाने की दुविधा के बीच संगठन के सामने सबसे ज्यादा मुश्किल नए नेताओं को टिकट देकर पार्टी की अंतरकलह को रोकना है।

नए चेहरों पर दांव खेलने की तैयारी

सरगुजा संभाग की 14 सीटों में भाजपा से दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है, बावजूद इसके भाजपा की मुसीबत कम नहीं हो रही है। पार्टी नए चेहरों पर दांव खेलना चाह रही है, लेकिन सामाजिक और जातिगत समीकरण के आधार पर हारे हुए नेताओं की दावेदारी परेशानी का सबब बन रही है। पिछले चुनाव में रामविचार नेताम, रजनी त्रिपाठी, विजय प्रताप सिंह, गणेशराम भगत जैसे नेताओं को हार का सामना करना पड़ा था।

कोरिया जिले की तीनों सीटें जीतने के बाद भी भाजपा में पुराने चेहरों पर दांव लगाने से हिचक रही है। पिछले चुनाव में भाजपा ने यहां दो विधानसभाओं में नए चेहरे उतारे थे। बैकुंठपुर एवं भरतपुर सोनहत सीट पर वर्तमान विध्ाायकों के एंटी इंकम्बेंसी का आंकलन कर रही है। बैकुंठपुर में पिछले चुनाव में भइयालाल राजवाड़े एक हजार मतों से चुनाव जीते थे। सरगुजा का चुनाव परिणाम प्रत्याशी चयन पर निर्भर करेगा। भाजपा के आला नेताओं ने बताया कि पार्टी हारी सीटों पर नये चेहरे को मौका देने से परिणाम पर असर पड़ेगा।