0 बीमार वृद्घा को अंबिकापुर लाने संजीवनी 108 की भी सुविधा नहीं मिली

अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

सरगुजा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की कैसी स्थिति है, इसका आंकलन बुखार और सिर दर्द जैसी बीमारी से पीड़ितों को रिफर कर देने से होता है। जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और दवाओं की उपलब्धता का दावा करने वाला स्वास्थ्य विभाग ऐसे मामलों को लेकर गंभीर नहीं है। सरकारी सुविधाओं और संसाधनों के बाद भी जरूरतमंद गरीबों को कर्ज लेकर या रुपये की व्यवस्था करके निजी किराए के साधनों से अस्पतालों का चक्कर काटना पड़ रहा है। ऐसे हालातों से जूझते ग्रामीण वृद्घ महिला को लेकर सायरराई से अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे, जहां लगभग आधे घंटे रजिस्ट्रेशन काउंटर में पर्ची कटाने के लिए कतार में इन्हें लगना पड़ा।

रघुनाथपुर पुलिस चौकी अंतर्गत ग्राम सायरराई निवासी वृद्घ तीलो बाई पति धनसाय 59 वर्ष को सिर दर्द व बुखार की शिकायत थी। चलने-फिरने में असमर्थ महिला को गांव से ऑटो में लेकर परिजन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रघुनाथपुर पहुंचे, यहां आने के बाद वृद्घा के उपचार की सुध किसी ने नहीं ली और जीवनदीप समिति रघुनाथपुर की पर्ची कटाने पर उसमें रेफर्ड टू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल लिखकर रवाना कर दिया। वृद्घा के परिजनों ने बताया कि रघुनाथपुर अस्पताल में किसी ने बीमार का नब्ज टटोलने की भी जरूरत नहीं महसूस की और न ही रिफर केस को ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा मिल पार्ई। ऐसे में परिजन उसे ऑटो से लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर पहुंचे। यहां आने के बाद पर्ची कटाने के लिए भीड़ में उन्हें मशक्कत करनी पड़ी। आधे घंटे से अधिक रजिस्ट्रेशन काउंटर में पर्ची कटाने में लगा, तब कहीं वे उसे चिकित्सक के पास बांहों के सहारे टांगकर दिखाने के लिए पहुंच पाए।

स्ट्रेचर-व्हील चेयर की कमी खली

सायरराई से ऑटो में गंभीर रूप से बीमार वृद्घा को लेकर पहुंचे परिजनों को ओपीडी पार करके चिकित्सक कक्ष तक ले जाने काफी मशक्कत करनी पड़ी। बांहों के सहारे वृद्घा को लटकाए उसे ओपीडी तक ले जाते इन्हें देखा गया। अस्पताल में स्ट्रेचर और व्हील चेयर की उपलब्धता के बाद भी ऐसी स्थिति का सामना इन्हें करना पड़ रहा था। ओपीडी के गेट में आए दिन एक भी स्ट्रेचर या व्हील चेयर के नहीं रहने से ऐसी परिस्थितियां हरदम निर्मित होती हैं।

500 रुपये में ऑटो करके पहुंचे

मरीजों को लाने-ले जाने के लिए छग शासन की ओर से की गई 108 संजीवनी की व्यवस्था के बाद भी वृद्घा को लेकर अंबिकापुर आने इन्हें संजीवनी की सुविधा नहीं मिल पाई। ऐसे में इन्हें रुपये की व्यवस्था करके पांच सौ रुपये में किराए का ऑटो करके मेडिकल कॉलेज अस्पताल आना पड़ा। ग्रामीणों के पास स्मार्ट कार्ड तो था, लेकिन जेब में रुपये नहीं थे। अगर रघुनाथपुर से इन्हें एंबुलेंस की सुविधा मिली होती, तो 500 रुपये का अतिरिक्त बोझ इन्हें नहीं वहन करना पड़ता।