अम्बिकापुर। गुणवत्तामूलक शिक्षा की लगातार बात होती रहती है। बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा से जोड़ने के प्रयास होते रहते हैं। यह प्रयास अक्सर काफी सफल भी होते हैं। शिक्षकों का जज्बा और ज्ञान के प्रति उनका समर्पण भाव ही बच्चों को आगे लेकर जाता है। इसी तरह का एक प्रयोग सरगुजा जिले के एक ग्रामीण स्कूल में चल रहा है।

जिला मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित सोनपुर कला मिडिल स्कूल की एक शिक्षिका ने बच्चों को जापानी पद्घति के जरिए अनोखे अंदाज में पढ़ाने का काम शुरू किया है। इस पद्धति को कमीशीबाई थिएटर का नाम दिया गया है।

पढ़ाई में ऐसे मदद करता है कमीशीबाई थियेटर

इस थिएटर के जरिए बधाों को इंग्लिश की कहानियों को हिंदी में अनुवाद करके सचित्र बताने के साथ गणित व विज्ञान की पढ़ाई भी कराई जा रही है। स्कूल में उक्त शिक्षिका के द्वारा अपने हाथों से कमीशीबाई थिएटर बनाया गया है। इस हैंडमेड थियेटर को कार्टून बॉक्स और पानी की बोतल के जरिए बनाया गया है। इसमें ज्ञान वर्धक पाठ रोल कर थिएटर को आगे बढ़ाया जाता है।

इसके माध्यम से किसी विषय की सचित्र जानकारियां बच्चों को दी जाती हैं। स्कूल की शिक्षिका हिना परवीन कि इस पहल से ग्रामीण क्षेत्र के बधाों में पढ़ाई को लेकर रुचि बढ़ी है। इसके उपयोग से हर विषय को समझने में बच्चों को आसानी हो रही है। बच्चेे अब सवालों का जवाब भी खुद ही ढूंढ लेते हैं।

बच्चों के साथ मिलकर शराब बंदी की भी चला रहीं मुहिम

थिएटर के जरिए पढ़ाई करा रही शिक्षिका हिना परवीन ने सोनपुर कला गांव में हर बच्चेे के घर में अपना संपर्क बनाया है। 80 फीसद बच्चों का घर वह जानती हैं और बच्चों के घर वाले भी उन्हें जानते हैं। बच्चों और उनके परिवार की हर परिस्थिति से शिक्षिका वाकिफ हैं। यदि कोई बच्चा स्कूल नहीं पहुंचता है तो तत्काल उसके घर पहुंच कर उसे स्कूल तक लाने का भी काम कर रही हैं।

ग्राम संपर्क अभियान भी निरंतर जारी रखती हैं और गांव में शराब बंदी को लेकर भी अभियान चलाया है। बच्चों के जरिए अभिभावकों को यह संदेश दे रही हैं कि शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। बीमार बच्चों को अस्पताल तक लाकर इलाज कराना और उनकी छोटी छोटी समस्याओं को दूर करने का काम भी शिक्षिका कर रही हैं। स्कूल के इस नवाचार के कारण एपीजे अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवत्ता अभियान के अंतर्गत अतिरिक्त अंक भी स्कूल को मिला है।