रायपुर। विधानसभा अध्यक्ष के बंगले को लेकर शुभ-अशुभ का टोटका नई सरकार में भी सामने आने लगा है। छत्तीसगढ़ में अब तक जितने भी चुनाव हुए हैं, उसमें विधानसभा अध्यक्ष को हार का सामना करना पड़ा है। इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष को आरक्षित बंगले के वास्तु को भी जिम्मेदार माना जाता रहा है। इसे दूर करने के लिए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने वास्तु पूजा के बाद बंगले में प्रवेश किया था।

अब नए विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत के सामने भी यही संकट खड़ा हो गया है। डॉ महंत के करीबी नेताओं की मानें तो वे विधानसभा अध्यक्ष के लिए आरक्षित बंगले में तो रहेंगे, लेकिन देवेंद्र नगर के बंगले को भी अपने पास रख सकते हैं।

इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि डॉ महंत ने देश और राज्य की राजनीति में जो मुकाम पाया, वह देवेंद्र नगर के बंगले में रहकर ही पाया। अब संपदा विभाग यह तय करने में उलझ गया है कि डॉ महंत के नाम से दो बंगला किस तरह अलॉट किया जाए। बताया जा रहा है कि यूपीए सरकार में डॉ महंत जब मंत्री बने, उस समय भी वे इसी बंगले में रहते थे। विधानसभा चुनाव के दौरान भी पूरी राजनीतिक गतिविधियां यहीं से संचालित हुई।