बालोद नईदुनिया न्यूज

बीते दिनों पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 1752 नशे की गोली बरामद करने में सफलता अर्जित की । वहीं अब इस बात को लेकर भी सवालिया निशान उठने लगे हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में आखिर नशे की गोलियां कारोबारी को कहां से मिली। ज्ञात हो कि नशीली दवा स्पासमा प्राक्सीवान गोली बिना डॉक्टर के पर्ची के दिए जाने पर पूरी प्रतिबंधित है। बावजूद उसके इतनी बड़ी मात्रा में गोली बरामद होने से ड्रग्स विभाग के जिम्मेदार अफसरों के साथ-साथ कई मेडिकल स्टोर के संचालक भी संदिग्धता के कटघरे में है। ऐसा नहीं है कि भारी मात्रा में नशीली गोलियां बरामद करने का यह पहला मामला हो। इसके पूर्व भी पुलिस ने भारी मात्रा में गोली बरामद कर आरोपितों पर कार्रवाई की थी।

परंतु ड्रग्स विभाग की उदासीनता के चलते लगातार जहां नशीली दवाओं का कारोबार फल-फूल रहा है, तो वहीं प्रतिबंधित होने के बाद भी बिना किसी रोक-टोक के नशे की दवाएं मेडिकल स्टोरों से युवाओं की जिंदगी से खेलने वाले गोली कारोबारियों तक पहुंच रही है। ज्ञात हो कि जिला मुख्यालय बालोद सहित ग्रामीण अंचलों में लगातार नशीली दवाई का कारोबार अपने पूरे शबाब पर होने की चर्चा लगातार आ रही है। हालांकि इस मसले पर जिला पुलिस अधीक्षक एमएल कोटवानी के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए 1752 गोली जब्त करने के साथ ही आरोपी को गिरफ्तार भी किया गया है। परंतु इस मसले पर कड़ी कार्रवाई न होने के कारण लगातार नशीली दवाईयों का कारोबार बढ़ रहा है। उल्लेखनीय है नशीली दवाओं के कारण लगातार युवा पीढ़ी इसकी शिकार होती चली जा रही है, जिसके चलते कई परिवार तबाह होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। इसके पूर्व भी बालोद जिले में लगातार नशीली दवाओं पर नकेल कसने के लिए कार्रवाई की जाती रही है। बावजूद उसके इस कारोबार में विराम नहीं लग पा रहा है।

वर्तमान समय में जवाहर पारा, कुंदरूपारा, शिकारीपारा तथा मरार पारा में आज भी खुलेआम नशीली दवाओं मिलने की चर्चा नगर के प्रत्येक चौक-चौराहों पर है। बावजूद उसके नवयुवकों को गर्त में ले जाने वाले इस कारोबार पर नकेल नहीं कसी जा रही है। इसके पीछे एक मुख्य कारण यह भी है कि बालोद जिले में अब तक ड्रग्स अधिकारी की नियुक्ति न होने के कारण नशीली गोलियों के कारोबार पर शिकंजा नहीं कस पा रहा है। दुर्ग से यदा-कदा आने वाले अधिकारी शिकायत मिलने पर यदि आते भी हैं तो नशीली दवाओं के कारोबार करने वाले के साथ इनके मधुर संबंध होने की चर्चा भी बनी रहती है।

बॉक्स- तेज दर्द में होता है नशे की दवा का उपयोग

पुलिस द्वारा बरामद दवाई स्पासमा प्राक्सीवान का उपयोग भारी पेट दर्द अथवा गर्भवती महिलाओं के प्रसव के दौरान होने वाली पीड़ा को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। दवा में मौजूद ट्रामाडाल हाइड्रोक्लोरिक नामक तत्व के कारण पीड़ित को दर्द से जहां थोड़ी राहत मिलती है तो वहीं नींद भी आने लगती है। दवा का इस्तेमाल भीषण एवं असहनीय दर्द के वक्त ही किया जाता है। परंतु वर्तमान समय में लोग इसे नशे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह भी है कि प्रतिबंधित दवा खुलेआम मेडिकल स्टोरों पर भी बेची जा रही है। प्रतिबंधित दवा को बिना किसी डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के न दिए जाने के साथ ही इन दवाओं को बेचे जाने के लिए दुकानदारों को एक रजिस्टर में भी मेंटेन करना होता है। परंतु ड्रग्स विभाग की उदासीनता के चलते कई मेडिकल स्टोर संचालक समस्त नियमों को दरकिनार करते हुए खुलेआम यह दवाइयां बेच रहे हैं। तो कुछ राजनीतिक पहुंच रखने वाले दुकानदार भारी मात्रा में इन दवाओं को लाकर नशे के सौदागरों को दे रहे हैं। जिसके चलते लगातार कई युवक इन नशीली गोलियों के आदी होते चले जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो कुछ लोग इतने आदी हो चुके हैं कि दिन भर में 15 से 20 गोली तक सेवन कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में उनका क्या हश्र हो सकता है इस बात का अंदाज बेहद ही आसानी से लगाया जा सकता है।