बालोद। नईदुनिया न्यूज

कॉलेजों की परीक्षाएं कल से शुरू हो रही हैं जो छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण पल है। बधाों को एग्जाम प्रेशर से बचाने व सामान्य रहने के लिए घर वालों का सपोर्ट बेहद ही जरूरी है। कुछ जगहों में पेपर बिगड़ने के कारण आत्महत्या जैसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं जो काफी चिंताजनक है। बधो अपने टारगेट व अपने पालकों की उम्मीदों को पूरा करने के फेर में पूरे दबे हुए हैं। ऐसे समय में उन्हें यह समझना होगा कि डरे नहीं, यह बस परीक्षा ही तो है जो हर साल आएगी। नईदुनिया ने परीक्षा के इस समय बधाों की मानसिक स्थिति मजबूत करने तथा एग्जाम की डर को दूर भगाने के लिए शिक्षाविदों से टिप्स छात्रहित में लिए हैं।

शिक्षक करें छात्रों की मदद

प्रवीन गुप्ता ने कहा कि अगर कोई बधाा नियमित रूप से कॉलेज नहीं आ रहा है तो सबसे पहले शिक्षक उसकी अनुपस्थिति का कारण जाने। इसके बाद परीक्षा की तैयारी में मदद करें। बधाों को शिक्षक गाइड करें। उनका आत्मविश्वास जगाने का कार्य शिक्षक ही कर सकता है। अगर पेपर की मार्किंग स्कीम को देखकर तैयारी करवाई जाए तो मुश्किल नहीं होगी। प्रश्नपत्र की तैयारी शिक्षक करवा सकता है, हर विषय की तैयारी अलग-अलग करवा सकते हैं। वैसे भी शिक्षक का दायित्व बनता है कि वे परीक्षा को लेकर यह जाने और पता करे कि उसकी कक्षा में छात्रों की तैयारी कितनी हुई है। सबसे पहले बधाों के स्वमूल्यांकन में मदद करें। शिक्षक यह पता करें कि बधाों का टारगेट क्या है, उसका टारगेट पूरा करने मे मदद करे। हर विषय के पेपर में मार्किंग स्कीम अलग-अलग होती है। अगर शिक्षक चाहे तो बधाों को प्रश्नपत्र की तैयारी आसानी से करा सकते हैं। प्रश्नपत्रों के प्रारूप को समझकर बधाों की तैयारी कराएं। शिक्षक को यह समझ जाना चाहिए कि बधाों को किस टॉपिक की तैयारी कराए कि वह जल्दी से कवर कर ले। शिक्षक को यह पता होना चाहिए कि किस लेवल की तैयारी हुई है और कौन से विषय का कौन सा टॉपिक छूट गया है।

सालभर पढ़ाई करने से दूर होगा छात्रों का डर

भुनेश्वर योगी ने कहा कि हमें अपने दोस्तों से डर नहीं लगता। इसी तरह यदि हम सब्जेक्ट से भी दोस्ती कर लेंगे तो उसका डर भी खत्म हो जाएगा। जिस सब्जेक्ट से डर लगता है, शुरुआत से ही उसके प्रति सजग रहें और ज्यादा से ज्यादा समय उसको दें। इससे आपका डर खत्म हो जाएगा। पेपर पढ़ते समय अगर एक बार में प्रश्न समझ नहीं आए तो आगे बढ़ें। उस पर अटके नहीं, ऐसे प्रश्न पहले हल करे जो आपको अच्छी तरह से आते हों। उसके बाद अन्य प्रश्न बनाने की कोशिश करें, क्योंकि शुरुआत में लिखने की स्पीड अच्छी होती है। वहीं यदि छात्र सालभर पढ़ाई करेंगे तो अपने अंदर से डर को खत्म कर सकेंगे। यदि वो सिर्फ एग्जाम टाइम पर ही पढ़ना शुरू करेंगे तो प्रेशर की वजह से डर भी अपनी जगह बनाना शुरू कर देगा। एग्जाम हॉल में पेपर हाथ में आते ही एक लंबी सांस लेकर उसे शांत दिमाग से पढ़े। ये भूल जाएं कि आप कठिन पेपर पढ़ रहे हैं।

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समन्वय बेहतर हो जाए तो सफलता दूर नहीं: राधिका गुप्ता

शिक्षक राधिका गुप्ता के मुताबिक गुरु और शिष्य का संबंध तीर-धनुष की तरह भी कहा जाता है। धनुष की प्रत्यंचा उतनी ही खींची जाए जिससे तीर निशाने पर लगे। यही बात गुरु-शिष्य पर लागू होती है। शिक्षक छात्र की क्षमता समझ उनका मार्गदर्शन कर सकते हैं। छात्र अपनी कमजोरी भांप उसे दूर करने में शिक्षक की मदद ले सकते हैं। यदि यह समन्वय बेहतर हो जाए तो सफलता दूर नहीं है।