बालोद। नईदुनिया न्यूज

पुराना थाना के पीछे कुर्मीपारा में आयोजित भागवत कथा में भागवताचार्य पंडित मनोज दुबे ने श्रद्घालु श्रोताओं को भागवत के माध्यम से जीवन में मुक्ति का मार्ग बताया। आचार्य ने कहा गोकर्ण के माध्यम से भगवान तक पहुंच कर जीवन में सद्मार्ग अपनाएं, मुक्ति के लिए यही एक चाबी का काम करता है गोकर्ण ही एक चाबी है। 'जीवन में संतों की संगति करिए वहीं हमें मुक्ति का मार्ग बताते हैं'।

आचार्य ने कहा गो मतलब इंद्रियां, जो भगवान के प्रति हमें आसक्त करें'। हम जैसा आश्रय या संगत में रहेंगे वैसा ही बनेंगे। मन जगत की ओर लगाएंगे तो धन की ओर दौड़ेंगे और प्रभु की ओर लगाएंगे तो मुक्ति का मार्ग मिलेगा। भागवत आचार्य मनोज दुबे ने बताया पूरे विश्व में भारत का नैनीसारंग स्थल ही ऐसा है जो पवित्र है। जहां आज तक कोई पापी का चरण नहीं पड़ा है। उस तीर्थ में 16 साल के बालक ने 88 हजार ऋषियों को भागवत की कथा सुनाई थी। जहां आज भी हजारों साल से वहीं भगवान की कथा सुनी जाती है। कथा सुनने और सुनाने के लिए हजारों लोग लाइन में लगे हैं, वह कितना पवित्र और महान स्थान है आप सोच भी नहीं सकते। इसका मतलब यही है कि मुक्ति के लिए छोटे या बड़े का उपदेश मायने नहीं रखता, मायने रखता है उनके गुरु के समान स्थान, ज्ञान का, उनकी बुद्घि का जिनके मुख से हम भगवान की लीला सुनकर समझने की कोशिश में लगे हैं और अपने जीवन को तारने का प्रयास कर रहे हैं।

आचार्य ने कहा साधु बनने के लिए केवल कपड़े बदलने से कुछ नहीं होता, साधुओं की तरह आचरण और व्यवहार करना होता है। शुद्घ मन की साधना चाहिए। कर्म ऐसा हो कि आपके आचरण से लोग सीखें। मन भगवान की ओर लगाएं जिससे आपको जीवन के झंझट से मुक्ति मिले। भगवान कहते हैं संयम से जीवन शुद्घ होता है। स्वार्थ से दूर सन्मार्ग पकड़ें। भागवत आचार्य मनोज दुबे कहते हैं भगवान हमेशा परीक्षा के बाद, लीला के बाद ही जीवन को सफल करते हैं। कथा श्रवण करने से हमें सन्मार्ग मिलता है, तभी सत और चित्त दिखता है। आनंद से जीवन की मुक्ति नहीं होगी। हम कितने भी पढ़ लिख कर योग्य हो जाएं, पर संतों के सत्संग से ही हमें आनंद की प्राप्ति होती है। इसलिए उनका आश्रय हमारे जीवन को सुखी बनाता है। भोजन में मजा आ सकता है, पर आनंद नहीं। सुखी होने के लिए भगवान की शरण अति आवश्यक है। धरती में धर्म कम होते देख मुनि नारद दुखी हुए, तब भगवान ने, भागवत कथा श्रवण को मुक्ति का मार्ग बताया कलयुग में भागवत ही ऐसा माध्यम है जिससे आदमी अपने जीवन के अंतिम समय को सन्मार्ग में ले जाकर मुक्ति पा सकते हैं।