जगदलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। बस्तर लोकसभा सीट से कुल सात प्रत्याशी मैदान में हैं। लेकिन इनमें एक भी महिला नहीं। बावजूद इसके सुबह साढ़े नौ बजे तक मतदान केंद्रों में जो नजारा दिखा, उसमें महिलाओं की संख्या पुरुषों की अपेक्षा काफी ज्यादा रही। इस सीट पर वैसे भी महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है। यहां कुल 13 लाख 72 हजार 127 मतदाताओं में 7 लाख 12 हजार 261 महिला व 6 लाख 59 हजार 824 पुरुष और मतदाता हैं।

मतदान केंद्रों में महिलाओं की कतार

ग्रामीण मतदान केंद्रों में वोटिंग को लेकर महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। वैसे भी ग्रामीण महिलाओं की दिनचर्या सुबह चार बजे से ही शुरू हो जाती है, लेकिन मतदान केंद्रों में लगी कतार देखकर लग रहा है कि वे रोजाना की अपेक्षा आज और जल्दी उठकर सुबह के काम को निपटाकर मतदान केंद्रों तक पहुंची हैं। भोपालपटनम के चेरपल्ली, सुकमा के नागारास, दंतेवाड़ा के चितालंका, नारायणपुर के महका, पालकी, करलखा आदि मतदान केंद्रों में सुबह साढ़े छह बजे से ही महिलाएं जुटने लगी थीं। इनमें कई महिलाएं पांच-सात किलोमीटर पैदल चलकर पहुंची थीं।

ये भी पढ़ें : Bastar: दो दिन पहले जहां हुई बड़ी नक्सली वारदात, उसी श्यामगिरी में जमकर हो रहा मतदान

ये भी पढ़ें : मतदान से ठीक पहले चार नक्सली हथियार सहित गिरफ्तार

बस्तर सीट पर महिलाएं तय करती हैं पुरुषों का भाग्य

छत्तीसगढ़ के आदिवासी आरक्षित सीटों में शामिल बस्तर संसदीय सीट पर महिलाएं ही पुरुषों का भाग्य तय करती हैं। राज्य बनने के बाद से यहां हुए तीन आम चुनाव में केवल दो चुनाव में ही महिला प्रत्याशी चुनाव लड़ी हैं। 2014 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर सोनी सोनी ने चुनाव लड़ा था। उन्हें 16903 वोट मिले थे और जमानत जब्त हो गई थी। चुनाव मैदान में कुल आठ प्रत्याशी थे। 2009 में सात लोगों ने चुनाव लड़ा था, उनमें कोई भी महिला नहीं थी। वहीं, 2004 में हुए पहले चुनाव में दो महिलाओं दासी बाई निर्दलीय और शकुंतला एटटी सपा के टिकट पर भाग्य आजमाया था। दोनों की जमानत जब्त हो गई थी। उन्हें क्रमश: 24556 और 4510 वोट मिले। लेकिन इस चुनाव में एक भी महिला प्रत्याशी मैदान में नहीं है।