बेमेतरा। नईदुनिया न्यूज

बेमेतरा जिला के साजा जनपद पंचायत में शिक्षाकर्मियों के फर्जीवाड़ा के मामले में अगर बात की जाए तो नए-नए इतिहास शिक्षाकर्मी के मसले को लेकर अवश्य ही बनते जा रहा है। आलम यह है कि अधिकारी तथा जनपद से जुड़े हुए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को भी न्यायालय के आदेश की परवाह नहीं रह गई है। अपनों को उपकृत करने के नाम से जिस तरह से रुपए पैसे के लेनदेन कर गंदा खेल साजा जनपद पंचायत में खेला जा रहा है। वह पूरे प्रदेश में एक मिसाल अवश्य ही कहा जा सकता है। फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति फर्जी स्थानांतरण आदेश पर नियुक्ति यहां बहुत सामान्य बात हो कर रह गई है।

सीईओ जनपद पंचायत साजा के आदेश क्रमांक 1103 दिनांक 20 अगस्त 2018 को एक आदेश जारी किया है। जिसमें सहा शिक्षक पंचायत द्वयरोहाणी झा प्राथमिक शाला केवतरा और डामेशवरी निषाद प्राथमिक शाला सुवरतला को आगामी आदेश पर्यंत तक उक्त शालाओं में पदस्थ किया गया है। चूंकि उक्त शिक्षकों को सीईओ जनपद पंचायत साजा ने उनके नियुक्ति के समय आवेदन में संलग्न प्रमाण पत्रों को सत्यापन के बाद फर्जी पाए जाने पर 19 मई 2014 को उन्हें सेवा से पृथक कर दिए थे। जिसे वे चुनौती देते हुए कलेक्टर और कमिश्नर न्यायालय से होते हुए उधा न्यायालय ले गए न्यायालय ने रिट पिटिसन क्रमांक 984 ऑफ 2018 में जो ऑर्डर किये है। जिसमे उन्होंने पाया कि बरखास्तगी में पंचायत राज अधिनियम 1999 के धारा 07 के नियमो का पालन सेवा से पृथक करते समय नहीं किया गया है। जिसके चलते उक्त शिक्षकों के साथ नैसर्गिक न्याय का पालन नहीं किया गया। जिसके चलते न्यायालय ने सेक्रेटरी डिपार्टमेंट ऑफ पंचायत एंड रूलर डेवलपमेंट को दिशा-निर्देश दिए कि जो अधिकारी नियमों का पालन किये बगैर ऐसे कृत्य किये है। उनके विरुद्घ अनुशासनात्मक कार्रवाई किया जाए। चुंकि न्यायालय ने अपने ऑर्डर में कहीं नहीं लिखे है कि उक्त शिक्षक निर्दोष है बल्कि बर्खास्तगी के तरीके को गलत ठहराया गया है। नियमानुसार सीईओ को पुनर्नियुक्ति के बाद तत्काल विभागीय जांच दल बिठाकर कार्रवाई करनी थी। जो लगभग छह माह बाद भी शुरू नहीं हो पाई है। सीईओ की अकर्मण्यता के चलते ऐसे लोगो के ऊपर कार्रवाई नहीं होने के चलते जिले के विभिन्ना जनपदों में कई बर्ख़ास्त शिक्षाकर्मियों द्वारा पुनर्नियुक्ति का प्रयास की चर्चा जोरों पर है। दूसरी बात अब तक विभिन्ना न्यायालयीन मामलों में जनपद पंचायतों के सीईओ द्वारा इन मामलों में मुख्य रिस्पॉडिंग पर्सन होने के बावजूद भी अपना पक्ष नहीं रखने के चलते कई पिटिसनरों को लाभ मिलने की संभावना बनी रहती है। जिसके चलते ही न्यायालय ने संबधित विभाग के सेक्रेटरी को जो 1999 की धारा सात नियमों का पालन किये बिना कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के विरुद्घ अनुशासनात्म कार्रवाई का निर्देश भी जारी किये है, लेकिन संचालनालय ने अब तक उस जनपद पंचायत साजा के सीईओ के ऊपर कार्रवाई करने का निर्देश जारी भी नहीं किये है। जिन्होंने रोहणी झा और डामेश्वरी निषाद के विरूद्ध नियमानुसार बर्खास्तगी की कार्रवाई नहीं किये है। परिणाम स्वरूप आलम यह है कि इसी लचीले प्रशासनिक रवैया का अपात्र शिक्षाकर्मी ना केवल लाभ उठा रहे हैं। बल्कि वेतन का हरण कर शासन को भी चूना लगा रहे हैं।