देवकर/बेरला। नईदुनिया न्यूज

जमाने से बेमेतरा जिले सहति पूरे दुर्ग संभाग की शान और पहचान पवित्र जीवनदायिनी शिवनाथ नदी अब लगातार अवैध उत्खनन के कारण खुद की संरक्षण की गुहार लगा रही है। पानी की आपूर्ति के लिए बेरला ब्लॉक सहित पूरा बेमेतरा जिला शिवनाथ नदी के जल के ऊपर निर्भर है। वहीं विगत कई वर्षो से लगातार जिले में हो रहे पर्यावरण की क्षति से अब यह सदाबहार विशाल शिवनाथ नदी विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुका है। जिसे देखकर पर्यावरण प्रमेमी और शुभचिंतक हैरान है।

उल्लेखनीय है कि बेरला ब्लॉक सहित जिले की जीवनदायनी सदाबहार शिवनाथ नदी में इन दिनों जलस्तर के घटने के साथ सूखने लगी है। जिससे क्षेत्रवासी सहित जिलेवासी चिंतित है। जमाने में कभी न सूखने वाली सदाबहार नदी वर्तमान में आज गर्मी के दिनों में कई जगहों पर सूख चुकी है। वहीं धीरे-धीरे जल का स्तर कम हो रहा है। जो भविष्य में आने वाले संकटों व समस्याओं की ओर इशारा कर रहा है। पेयजल, निस्तारी, नदी आधारित धंधे, धार्मिक महत्व पर निर्भर आम नागरिक लगातार सूखने व जलस्तर घटने से काफी परेशान है। आलम यह है कि वर्षाकाल के दौरान करीब 500 मीटर तक चौड़े व कई फिट गहरे नजर आने वाला शांत प्राकृति का नदी सिर्फ 100 मीटर की चौड़ाई व कुछ फिट की गहराई वाले दायरे में सिमट चुका है और साल दर साल गर्मी के दिन में लगातार सिमटकर अब यह नाले जैसे दिखाई दे रहा है। इधर नदी पर निर्भर लोग दशकों से ऐसी विकराल तस्वरी देखकर अचरज में है। इधर बचाने के लिए प्रशासन और जिम्मेदार द्वारा कुछ अनदेखा कर रहा है। इसका खामियाजना समूचे जिलेवासी को चुकाना पड़ सकता है।

उद्यम क्षेत्र से लेकर संगम स्थल तक विशेष महत्व

प्रदेश की तीसरी सबसे बड़ी व महानदी की मुख्य सहायक शिवनाथ नदी राजनांदगांव ़जिले के अंबागढ़ तहसील की 625 मीटर ऊंची पानाबरस पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर जिला से होकर 290 किलोमीटर का सफर तय कर आखिर में शिवरीनारायण के पास महानदी में मिल जाती है। जिसमें इसकी सहायक के रूप में प्रवाह के दौरान सुरही, खारुन, अरपा, आगर, हाफ, मनियारी, सकरी, तांदुला, खरखरा, जमुनिया जैसी क्षेत्रीय नदी मिलती है। जहां संगम से लेकर अन्य कई जगहों पर नदी किनारे विशेष धार्मिक महत्व व मान्यता है। शिवनाथ के कुछ इलाकों को छोड़कर कई भागों पर वर्षभर नदी में नाव चलती है। जिससे इसकी प्राकृतिक सुंदरता और मनोरम है। तीन बड़े संभागों व उनके जिले से लेकर सीमांकन सहित अन्य काफी महत्वपूर्ण योगदान देती है।

शिवनाथ नदी का नामकरण के पीछे की असल कहानी

कई प्रचलित कथाओं के मुताबिक इसका नामकरण प्रदेश के गढ़चिरौली से व उद्यम एक खेत के मेड (दीवार) निकला माना जाता है। इसके मुताबिक एक गोड़ राजा के छह भाई और एक बहन थे। उस राजा के बहन फुलवाशन को एक आदिवासी लड़के शिवनाथ से एकतरफा प्रेम हो गया। इसके बाद राजा के भाइयों सहित उस लड़के के साथ राजा की बहन के बीच विवाह को लेकर कई घटनाक्रम हुए। जिसमे अंततः राजा के भाइयों ने दीवार में उस लड़के शिवनाथ को चुनवा दिए। जिसे देखकर शिवनाथ के प्रेम में पागल फुलवाशन ने उसी समीप अपनी जान दे दी। इसके बाद उस जगह पर से शिवनाथ का उद्यम व नामकरण माना गया। ऐसे और भी कई रोचक कथा शिवनाथ को लेकर प्रचलित है।

जिलेवासियों की नदी पर निर्भरता व जुड़ाव

जिलेभर के ज्यादातर इलाकों में बहने वाली शिवनाथ नदी की निर्भर है। बेरला ब्लॉक के 30 से ज्यादा गांवों के साथ ़जिले के 50 से ज्यादा गांवों के बीच यह बहती है। जिससे ग्रामीण से लेकर नगरीय, शहरीय और अन्य क्षेत्र के लोग इस पर निर्भर है। एक ओर जहां यह पेयजल के लिए जिले सहित निकटतन कवर्धा-रायपुर-दुर्ग जिले तक मीठे पेयजल की आपूर्ति करता है। वहीं कई मछुआरे भी नदी पर मछली पकड़कर जीवनयापन करते है। वहीं कृषि के लिए भी ज्यादातर जिलेवासी शिवनाथ पर निर्भर नजर आते है। वहीं बड़े उद्योग व कई निर्माण कार्य इन्हीं के ऊपर आश्रित है। इस तरह से कई क्षेत्र में शिवनाथ नदी का अमूल्य योगदान है।

माफियाओं के लगातार दोहन से पर्यावरण सिस्टम बिगड़ी

शिवनाथ नदी प्रवाह के इस विशाल क्षेत्र में लगातार वन माफिया, जल माफिया, रेत माफिया, भू-माफिया, बोर खनन माफिया सक्रिय है। क्षेत्र से लेकर जिले के हर दायरे में अंधा-धुंध वृक्ष की कटाई से लेकर रेत खनन व जल उपभोग खूब हो रहा है। जिसमें प्रशासन की जानकारी होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे सिर्फ औपचारिकता निभाकर नजर अंदाज कर खानापूर्ति कर संरक्षण प्रदान कर रहा है। वहीं आगामी भविष्य में शिवनाथ नदी ही विलुप्त होने की आशंका पर्यावरण विश्लेषकों द्वारा जताई जा रही है। जिससे जिलेवासियों को जल आपूर्ति से लेकर अन्य कई जरूरत के लिए भटकना पड़ सकता है।

शिवनाथ संरक्षण व नदी बचाओ अभियान की दरकार

वर्तमान में अगर वास्तव में नदी की हालत देखा जाए तो यह दिनों-दिन बदतर होती जा रही है। पवित्र जल में नालों के गंदे पानी को मिलाया जा रहा है। जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है। वहीं लगातार सिकुड़ते शिवनाथ की भयावह तस्वीर लोगों के बीच व सोशल मीडिया में जबरदस्त चर्चा में है। जिसे लेकर बड़े-बड़े प्रतिक्रिया सामने आ रहे है। परंतु असल में नदी के बचाव में सभी वर्ग नतमस्तक नजर आ रहे है। सरकार व प्रशासन शिवनाथ संरक्षण व नदी बचाओ जैसी राष्ट्रीय स्तर की अभियान भी सिर्फ सरकारी दफ्तरों की फाइलों व स्कूलों की पुस्तकों और नारों तक सिमटा है। असल में नदी के संरक्षण व बचाव अभियान महज कोरी परिकल्पना ही मात्र साबित हो रहा है। हालांकि कुछ समाजसेवी नदी बचाओ के लिए प्रयासरत जरूर है। वहीं इनके उलट धड़ल्ले से रेत निकानले से लेकर, बोर खनन व वृक्ष कटाई सब प्रशासन की जानकारी में हो रहा है। जिस पर प्रशासन की मेहरबानी समझ से परे है। महज औपचारिकता निभाकर ़जिला प्रशासन के कुछ अफसर खानापूर्ति में लीन है। जिसका खामियाजा आज जिले की जीवनदायिनी शिवनाथ नदी को चुकाना पड़ रहा है।

भविष्य में पेयजल जैसी गंभीर मुसीबत की ओर संकेत

आलम यह है, कि कुछ पर्यावरण चिंतकों द्वारा आगामी भविष्य में 2030 तक शिवनाथ पर निर्भर जिलेवासियों कोबढ़ते दोहन व उपभोग से मीठे पेयजल के लिए तरसना पड़ सकता है। वहीं हालत नहीं सुधरे तो आगामी दो से चार दशकों शिवनाथ की पूर्ण विलुप्ति के कयाम सक्रिय लोगों द्वारा जताई गई है।

शिवनाथ बचाओ अभियान में योगदान देने की अति आवश्यकताः संजय

शिवनाथ बचाओ आंदोलन के संयोजक व राष्ट्रीयकृत जनसुनवाई फाउंडेशन के राज्य समन्वयक संजय मिश्रा बताते है, कि शिवनाथ नदी बेमेतरा जिले की नहीं राज्य की निर्भरता है। क्योंकि राज्य की जीवनाधारा होने के कारण आधी आबादी इससे जुड़ी हुई है। चूंकि प्रशासन की अनदेखी से लगातार नदी में गंदे नालों-कारखानों का पानी मिलाकर दूषित व विषाक्त किया जा रहा है। हमारा आंदोलन पिछले डेढ़ साल से इस समस्या पर मुखर है और क्षेत्र से लेकर प्रदेश स्तर तक इसके लिए विचार व चर्चा किये जा रहे है। वर्तमान में शासन-प्रशासन से इस संबंध में मिलकर पत्र सौंपकर गंगा आरती की तरह शिवनाथ आरती भी संरक्षण के प्रयास से करवाये जा रहे है। सारे अवैध क्रियाकलापों को बंद कर प्रवाह क्षेत्र में वृक्षारोपण की अति आवश्यकता है। नालों को डायवर्ड करना जरूरी है। ऐसे तमाम कोशिश व पहल शिवनाथ बचाओ आंदोलन के तहत की जा रही है। इसके लिए शिवनाथ सेवा मंडल का गठन किया गया है। जिसमें शिवनाथ प्रहरी के रूप में लोगों को जोड़ रहे है। जिस प्रकार नदी की निर्भरता जनता पर है उसी प्रकार सभी जिम्मेदार नागरिकों को नदी के संरक्षण व बचाव में अपना बहुमूल्य योगदान देना चाहिए। ताकि भविष्य की पीढ़ी भी शिवनाथ के शुद्घ जल व अन्य जरूरत का लाभ ले सके। शिवनाथ सहित पर्यावरण विलुप्त होने से बच सके। पूर्वजों की अमूल्य धरोहर शिवनाथ को बचाना ही हमारी आंदोलन का प्राथमिक उद्देश्य है कि ताकि जनजीवन का आधार बना रहे है। इसके लिए हमारे संगठन द्वारा आगामी दौर में हजारों की तादाद में प्ररर्शन व हड़ताल करने की योजना चल रही है।