बेमेतरा। नईदुनिया न्यूज

फसल अवशेष को जलाने से उत्पन्ना होने वाले वायु प्रदूषण के खतरे के दृष्टिगत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (कोर्ट) ने आदेश जारी किए है। इसके अनुसार फसल अवशेष को खेत में जलाने पर दंड का प्रावधान किया गया है। कलेक्टर महादेव कावरे ने किसानों से अपील की है कि वे अपने खेत में फसल के अवशेष न जलाएं। फसल अवशेष जलाने से मृदा का तापमान बढ़ जाता है, जिससे मृदा की संरचना बिगड़ जाती है। जीवाष्म पदार्थ की मात्रा कम हो जाने से मृदा की उत्पादकता कम होने का खतरा होता है। फसल अवशेष जलाने से उस पर आश्रित मित्र कीट मर जाते है। जिससे मित्र कीट और शत्रु कीट का अनुपात बिगड़ जाता है, फलस्वरूप पौधों को कीट प्रकोप से बचाने के लिए मजबूरन महंगे तथा जहरीले कीटनाशकों का इस्तेमाल करना पड़ता है। जिसका दुष्प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर देखा जा रहा है। फसल अवशेष को एकत्र कर पशुचारे के रूप में उपयोग के लिए विक्रय भी किया जा सकता है। इसके अलावा फसल अवशेष का उपयोग नाडेप, वर्मीखाद जैसी कार्बनिक खाद बनाने में भी किया जा सकता है।