Naidunia
    Wednesday, April 25, 2018
    PreviousNext

    बीएसपी में हर माह 12 से 13 मौतें हो रही, ज्वाइंट स्टील सेफ्टी कमेटी ने उठाए सवाल

    Published: Tue, 13 Mar 2018 04:09 AM (IST) | Updated: Tue, 13 Mar 2018 04:09 AM (IST)
    By: Editorial Team

    भिलाई। नईदुनिया प्रतिनिधि

    भिलाई स्टील प्लांट एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। लगातार हादसों और हर महीने औसतन 12 से 13 मौतों पर सवाल उठाए गए हैं। बीएसपी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा, इसका संकेत स्टील इंडस्ट्री की ज्वाइंट कमेटी ऑफ सेफ्टी ने दिए हैं।

    कमेटी के राष्ट्रीय सदस्य ने भिलाई का दौरा कर संयंत्र प्रबंधन से इस बारे में सवाल-जवाब किया है। बता दें कि हादसों के आंकड़े देखे जाएं तो मुश्किल बढ़ाने वाले हैं। साल 2015 में पांच, 2016 में 12 और 2017 में पांच कार्मिकों की मौत हो चुकी है। वहीं, बीमारियों से मौत के मामले में भी हर महीने 12 से 13 मौत होने के कारण पूछे गए हैं। बीमारियों के कारण क्या हैं।

    ज्वाइंट कमेटी के सदस्य और इस्पात उद्योग में स्टील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव प्रद्युत मुखर्जी ने भिलाई का दौरा सोमवार को किया। भिलाई इस्पात संयंत्र के महाप्रबंधक सुरक्षा टी. पांड्याराज से भेंट की और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर बातचीत की। उन्होंने भिलाई इस्पात संयत्र में लगातार बढ़ रही दुर्घटनाएं विशेषकर प्राण घातक दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। इस दौरान उनके साथ हिन्दुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन के अध्यक्ष एसपीडे, सहायक महासचिव सविता मालवीय, सचिव अली अकबर के अलावा सीटू सेफ्टी अपेक्स कमिटी के सदस्य कुंज बिहारी मिश्रा और जेके वर्मा भी उपस्थित थे।

    मौत के कारणों में कहीं प्लांट का डस्ट तो नहीं

    पिछले कुछ वर्षों से बीमारियों की वजह से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ गई है। हर महीने औसतन 12 से 13 मौतें हो रही है। सीटू नेता ने प्रबंधन से मांग की कि ब्लास्ट फर्नेस, कोक ओवन, सिंटरिंग प्लांट जैसे विभागों से लगातार भारी मात्रा में डस्ट एवं विषाक्त गैस उत्सर्जन की शिकायत प्राप्त हो रही है। प्रबंधन को यह जांच करनी चाहिए कि कहीं यह उत्सर्जन परिसीमन मानक से अधिक तो नहीं है। इससे कर्मचारी व्यवसायिक बीमारियों के शिकार तो नहीं हो रहे हैं।

    सुरक्षा समिति पर चले तीखे तीर

    सुरक्षा समितियों में कर्मियों से प्रबंधन की अधिक संख्या और प्रबंधन द्वारा तय किए गए कर्मियों के प्रतिनिधि पर सवाल उठाया गया। प्रबंधन से जानकारी ली गई कि यह किस तरह से विधि सम्मत है कि कर्मचारियों के प्रतिनिधि प्रबंधन तय करें। कारखाना अधिनियम 1948 की धारा-41 के अनुसार सुरक्षा समितियों में प्रबंधन और कर्मियों के प्रतिनिधियों की संख्या बराबर होनी चाहिए। इसी तरह कारखाना अधिनियम की धारा-41 और कारखाना नियम 1962 के नियम 73 के अनुसार सुरक्षा समितियों में कर्मियों के प्रतिनिधि कर्मियों द्वारा ही चयन किया जाना चाहिए। इसका पालन न करने के पीछे क्या कारण थे। बचाव में प्रबंधन जवाब देता रहा, लेकिन सदस्य संतुष्ट नहीं हुए।

    सेल का नियम भिलाई में ही फॉलो नहीं

    प्रद्युत मुखर्जी ने सवाल किया सेल की अन्य इकाइयों में अपनाई जाने वाली परिपाटी का भिलाई में क्यों पालन नहीं हुआ। सांविधिक प्रावधानों का पालन करने के लिए सेल की अन्य इकाईयों में कर्मचारियों द्वारा चुने गए यूनियन से कर्मचारी प्रतिनिधियों का नाम लिया जाता है, जबकि भिलाई में प्रबंधन द्वारा एक तरफा कर्मियों के प्रतिनिधियों के नाम तय किए गए। विधिक प्रावधानों का उल्लंघन तक बताया। इस बात का जवाब प्रबंधन की ओर से नहीं दिया जा सका।

    संयंत्र के हर विभाग में बने सुरक्षा समिति

    प्रद्युत मुखर्जी ने यह भी कहा कि सेल की सभी इकाइयों में स्टील प्लांट को एक फैक्ट्री के रूप में पंजीकृत कराया गया है। भिलाई में कुल 43 फैक्ट्री पंजीकृत है, जबकि 26 फैक्ट्रियों में सुरक्षा समिति बनी है। सीटू नेता ने कहा कि सेल की अन्य इकाइयों में हर विभाग में सुरक्षा समितियां बनती है। भिलाई में भी पहले हर विभाग में सुरक्षा समितियां थी। यह आश्चर्य की बात है कि लगातार बढ़ती दुर्घटनाओं के बावजूद प्रबंधन सुरक्षा समितियों को हर विभाग में सक्रिय नहीं कर रही हैं।

    पीएम ट्रॉफी पर भी संशय

    मान्यता प्राप्त यूनियन सीटू के अध्यक्ष एसपी डे ने कहा कि दुर्घटनाओं में हो रही मौत चिंता का विषय। यह निश्चित रूप से खतरनाक छवि पेश हो रही है। यही हालात रहे तो 12वीं बार प्रधानमंत्री ट्राफी मिलने में हादसे ही बाधा बन सकते हैं। प्राण घातक दुर्घटना की संख्या लगातार बढ़ रही हैं। इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने पर चर्चा की गई। स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो राष्ट्र का सर्वश्रेष्ठ इस्प्पात संयंत्र बने रहने का गौरव भी भिलाई इस्पात संयत्र के पास नहीं रहेगा। व्यवसायिक बीमारियों से बढ़ रही मौत पर ध्यान देकर प्रबंधन हालात को सुधार सकता है।

    और जानें :  # bhilai news
    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें