भिलाई। नईदुनिया प्रतिनिधि

छत्तीसगढ़ राज्य अस्तित्व में आने से पहले ही दुर्ग के मुख्य मार्ग स्टेशन रोड को पहचान मिल गई थी। सन्‌ 1995-96 में स्टेशन चौक स्थित सबसे व्यस्त चौराहे और भौगोलिक लिहाज से अलग महत्व रखने वाले चौक में भगवान अग्रसेन महाराज की प्रतिमा अग्रवाल समाज द्वारा स्थापित की गई थी। समाज के पदाधिकारी बताते हैं कि यह प्रदेश का सम्भवतः पहला अग्रसेन चौक था।

तत्कालिक अग्रवाल युवा मित्र मंडल के अध्यक्ष संजय गर्ग ने बताया कि करीब 24 साल पहले 1995-96 में दुर्ग नगर निगम से चौराहे को अग्रवाल समाज को देने के लिए दरख्वास्त किया था। उन्होंने बताया कि तब चौक मिला। दुर्ग जिला अग्रवाल समाज द्वारा वहां भगवान अग्रसेन महाराज की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि तब राजस्थान से संगमरमर की प्रतिमा विशेष तौर पर मंगाई गई थी। उन्होंने बताया कि तब शहर के मुख्य मार्ग के स्टेशन रोड के नाम से ही जाना जाता था। किन्तु अग्रसेन महाराज की प्रतिमा स्थापित होने के बाद क्षेत्र और बे-नाम चौराहे को भी पहचान मिली थी। अब आलम यह है कि क्षेत्र को अग्रसेन चौक और अग्रेसन चौक रोड के नाम से ही जाना जाता है।

चौराहे निर्माण के दौरान सक्रिय रहे तब की युवा इकाई के अध्यक्ष संजय गर्ग ने बताया कि मूर्ति समाज के सहयोग से स्थापित किया गया था। साथ ही करीब चार फीट से महाराज अग्रसेन की सिंहासन में बैंठी हुई प्रतिमा है।

समाज के वर्तमान कार्यकारिणी सदस्य संजय गर्ग ने बताया कि दुर्ग का अग्रसेन चौक प्रदेश में सम्भवतः पहला अग्रसेन चौक था। इसके बाद भिलाई के नेहरू नगर, रायपुर के समता कॉलोनी और अन्य जगहों में अग्रसेन चौक बनाया गया था।

भवन का हुआ था जीर्णोद्धार

अग्रवाल समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि महाराजा अग्रसेन की मूर्ति स्थापित होने के साथ ही चौक के पास ही अग्रसेन भवन का जीर्णोद्धार किया गया था। तब अग्रसेन भवन जरूर था, किन्तु चौराहे निर्माण के साथ ही भवन की रूप-रेखा भी बदल गई थी।