भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट के सबसे पुराने और रुस की मदद से स्थापित ब्लास्ट फर्नेस-1 में मंगलवार सुबह ब्लास्ट हो गया। तेज आवाज से फर्नेस की दीवार फट गई। भीतर बन रहा करीब दो हजार टन हॉट मेटल 20 मीटर के दायरे में फैल गया। हॉट मेटल की चपेट में आने वाली हर चीज खाक होती चली गई। इसके साथ ही आग लग गई।

मौके पर मौजूद कर्मचारी को धुएं से अचानक तेज खांसी आने लगी। उसे सेक्टर-9 हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। फायर ब्रिगेड के जवान मौके पर आग को काबू करने में जुटे रहे। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया जा सका। घटना शिफ्ट चेंजिग के समय हुई अन्यथा बड़ी घटना हो जाती। आम तौर पर यहां 25 से 30 कर्मचारी रहते हैं।

मंगलवार सुबह करीब 6.15 बजे बीएसपी के पहले ब्लास्ट फर्नेस-1 में तेज धमाका हुआ । मौजूद कर्मचारी कुछ समझ नहीं सके और आवाज सुनकर फर्नेस की ओर दौड़ पड़े। करीब 45 मीटर ऊंचाई से फर्नेस से हॉट मेटल बाहर आता देख हड़कंप मच गया। जान बचाने कर्मचारी बाहर की ओर भागने लगे। आसपास काम कर रहे कर्मचारियों को फर्नेस एरिया से बाहर किया गया। देखते ही देखते हॉट मेटल सड़क की तरफ आकर रेलवे लाइन पर भी पिघलता लोहा आकर जमने लगा। पटरी पर स्क्रैप से लदा वैगन खड़ा था, उस पर ऊंचाई से हॉट मेटल गिरने से आग लग गई। ईडी वर्क्स टीबी सिंह, जीएम फर्नेस सहित सभी उच्चाधिकारी आधे घंटे के भीतर मौके पर पहुंच गए। कर्मचारियों की जान बचाने के लिए अंदर जांच पड़ताल की।। आग पर काबू पाने के बाद स्थिति सामान्य हुई।

फर्नेस फटने का कारण

-फर्नेस की उस जगह के प्लेट पर छेद होने से सेल फटा, जहां लोहा गर्म होता है।

- फर्नेस की भीतरी दीवार पर स्पेशल क्वालिटी के ईंट होते हैं, अंदर ईंट हटने से हॉट मेटल ने बाहरी दीवार को कमजोर कर दिया।

-1200 डिग्री से ज्यादा तापमान में गैस का प्रेशर बाहर की कमजोर दीवार सह नहीं सकी।

- कोक या मेटेरियल अचानक बाहर नहीं आते, धीरे-धीरे छोटे साइज के छेद से संकेत देने शुरू कर देते हैं, लेकिन ध्यान न देने के कारण बड़ा रूप ले लिया।

करोड़ों रुपए का नुकसान

फर्नेस के अधिकारी बता रहे हैं कि करीब पांच से दस करोड़ स्र्पए का नुकसान रोज हो रहा है। मरम्मत में करोड़ों खर्च करने होंगे। रोज दो हजार टन हॉट मेटल का प्रोडक्शन न होने से यह अलग से नुकसान होगा। रेल लाइन सहित फर्नेस के सभी पार्ट पर हॉट मेटल जम गया है। हॉट मेटल को काटकर बाहर निकालने के बाद ही मरम्मत शुरू हो सकेगा। इन सब कार्य में कम से कम 15 दिन लगना तय है।