भिलाई। नईदुनिया प्रतिनिधि

सफेद बाघ किशन और बाघिन रोमा का जोड़ा अब जनवरी में लगेगा। नवंबर में जोड़ा लगाने की तैयारी थी। दोनों को एक बाड़ा में लाया भी गया, लेकिन ठंड को देखते हुए अलग कमरे में रखा जा रहा है। ठंड में शावकों के जन्म लेने से सेहत पर असर पड़ सकता है। इसलिए मैत्रीबाग प्रबंधन ने जनवरी में प्रजनन कराने का फैसला लिया है ताकि मार्च या अप्रैल में शावकों का जन्म हो सके। उस वक्त ठंड खत्म हो चुकी होगी।

मैत्रीबाग जू में सफेद बाघ किशन और बाघिन रोमा से व्हाइट टाइगर का कुनबा बढ़ाने की तैयारी है। चिकित्सकों का कहना है कि तीन से चार माह में सफेद बाघिन बच्चे को जन्म देती है। पूर्व की तैयारियों के मुताबिक जनवरी में शावक जन्म ले लेता। अधिक ठंड से सफेद बाघ के बाड़ा में बच्चों को कोई दिक्कत न होने पाए, इसलिए समय को बढ़ा दिया गया है। मैत्रीबाग के प्रभारी एजीएम डॉ. नवीन कुमार जैन का कहना है कि रोमा और किशन को अलग-अलग ही रखा जा रहा है। उत्तर भारत में बढ़ती ठंड को देखते हुए यहां के मौसम पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए किसी तरह का कोई जोखिम नहीं लिया जा रहा है। जनवरी में प्रजनन कराया जाएगा, जिससे ठंड का असर शावकों पर न पड़ने पाए।

इधर, फ्लॉवर शो की तैयारियां जोरो पर

मैत्रीबाग में प्रदेश का सबसे बड़ा फ्लॉवर शो फरवरी के प्रथम सप्ताह में आयोजित है। इसकी तैयारियां युद्घस्तर पर चल रही है। फूलों की बहार बिखेरने के लिए गमलों में पौधे तैयार किए जा रहे हैं। जर्जर और टूटे स्ट्रक्चर का मेंटेनेंस किया जा रहा है। चिल्ड्रेन पार्क में बच्चों के बैठने का स्थान संवारा जा रहा। स्टील की छतरी लगाई जा रही है। आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए इसको मल्टीकलर में रंगा जाएगा ताकि दूर से ही बच्चे इस ओर आकर्षित हो सकें। वहीं, उद्यानों में घासों की कटाई और कचरे की सफाई का काम भी तेजी से चल रहा है।

संगीत की धुन के साथ कलरफूल फव्वारा

प्रगति मैदान के पास फव्वारा का रंग अब बदल गया है। दिन में सफेद और शाम ढलते ही मल्टीकलर के फव्वारे का मजा लिया जा सकता है। इसी तरह मैत्रीबाग के अन्य फव्वारे का भी संधारण किया जा रहा है। लाइट के साथ संगीत का भी इंतजाम किया गया है। मैत्रीबाग के सबसे पीछे बजने वाले संगीत की धुन को हर तरफ पहुंचाने के लिए स्पीकर लगाए जा रहे हैं।

बच्चों की चहलकदमी बढ़ी

गुलाबी ठंड का लुत्फ उठाते हुए बच्चों को मैत्रीबाग की सैर कराई जा रही है। शनिवार को अलग-अलग स्कूलों के तीन हजार से ज्यादा बच्चों ने मैत्रीबाग में सुबह से शाम तक वक्त गुजारा। उद्यान में खेल-कूद में मशगूल रहे। जू में टाइगर की दहाड़ और हिरन की चहलकदमी को करीब से देखते और सुनते रहे। स्कूलों के शिक्षक भी बच्चों संग बचपन के एहसास में डूबे रहे। कोई सेल्फी लेता रहा तो कोई बच्चों संग खेलता रहा।