भिलाई। नईदुनिया प्रतिनिधि

सेंटर ऑफ स्टील वर्कर्स-एक्टू का कहना है कि बीएसपी में श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है। ऐसा नहीं करने वाले ठेकेदारों को ब्लैक लिस्टेड तक नहीं किया जा रहा है। ठेका श्रमिकों के साथ न्याय नहीं किया जा रहा है। लोकतांत्रिक अधिकारों और श्रम-कानून के दायरे में मिलने वाली तमाम सुविधाओं की गारंटी प्रबंधन नहीं ले रहा है।

महासचिव श्याल लाल साहू का कहना है कि कार्यस्थलों के पहुंच मार्गों की बेहतर मरम्मत कर सड़कों की दोनों तरफ रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। कार्यस्थलों पर हर तरफ स्क्रैप पड़े हैं। इसकी साफ-सफाई होनी चाहिए। धूल की मोटी परतें जमी हैं, उनकी नियमित सफाई पर ध्यान दिया जाए। साथ ही ऐसे क्षेत्रों में फाउंटेन की व्यवस्था की जाए। रेलवे ट्रैकों में हाई मास्क व लो-मास्क लगाकर रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था की जा सकती है। प्रत्येक कार्यस्थल में मौसम के अनुसार शुद्घ पेयजल की व्यवस्था अनिवार्य रूप से किया जाए। कूलर व शुद्घ पेयजल की व्यवस्था के साथ विश्राम-कक्षों की व्यवस्था अनिवार्य रूप से किया जाए। श्याम लाल साहू बताते हैं कि खुर्सीपार गेट की सड़क का अतिशीघ्र डामरीकरण किया जाए। बीएसएनएल चौक से बोरिया गेट पहुंच मार्ग को जल्द दुरूस्त कर सड़क की दोनों तरफ रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था की जाए, ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके। यूनियन का कहना है कि अगर सरकार व प्रबंधन सचमुच लोकतांत्रिक, सांविधिक और श्रमिक हितैषी है तो फिर मजदूरों को उनका जायज हक क्यों नहीं मिल पाता। आखिर श्रम कानूनों की सरेआम धज्जिायां क्यों उड़ाई जा रही हैं?