भिलाई। नईदुनिया प्रतिनिधि

भिलाई इस्पात संयंत्र के क्रीड़ा, सांस्कृतिक एवं नागरिक सुविधाएं विभाग द्वारा आयोजित इप्टा के 20 दिवसीय ग्रीष्मकालीन बाल नाट्य शिविर के 13वें दिन शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के चार वरिष्ठ साहित्यकारों ने अपना अनुभव प्रशिक्षणार्थियों के साथ साझा किया। इसमें साहित्यकारों ने जीवन में संघर्ष को प्रतिपादित करते हुए बच्चों को संघर्ष से संबंधित कविताएं सुनाईं।

सेक्टर-1 स्थित नेहरू सांस्कृतिक कल्चरल हाउस में प्रशिक्षण के दौरान साहित्यकार प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष कवि परमेश्वर वैष्णव, कथाकार, उपन्यासकार लोक बाबू, जनवादी लेखक संघ के शायर मुमताज और जसम के क्रांतिकारी कवि वासुकी प्रसाद उन्मत ने बच्चों से संबंधित अपनी कविताएं सुनाई। परमेश्वर वैष्णव ने कहा कि आप जितना संघर्ष करोगे उतना यश पाओगे। संघर्ष है तो यश है सुविधा है तो दुविधा है। उन्होंने असहनीय पीड़ा पर अपनी कविता 'करलई होंगे' सुनाई। वहीं वासुकी उन्मत ने अपनी प्रसिद्घ कविता 'जलेबियां' सुनाई। वहीं जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय समिति के सदस्य प्रसिद्ध शायर मुमताज की सांप्रदायिकता पर चोट करती गजल की इन पंक्तियों 'पहले बने इंसान मुकम्मल कोई, इसके बाद बने हिन्दू, मुसलमान कोई ' को भी बच्चों की काफी सराहना मिली। उपन्यासकार लोक बाबू ने गौतम बुद्ध की एक कहानी के माध्यम से किसी भी बात के लिए स्वयं किसी निर्णय लेने पर जोर दिया। इस दौरान सभी साहित्यकारों का राजेश श्रीवास्तव ने परिचय कराया। सुचिता मुखर्जी ने आभार व्यक्त किया।

बच्चों ने कलाकृति बनाना सीखा

मणिमय मुखर्जी द्वारा तैयार कैफी आजमी की जन्म शताब्दी पर उन्हीं की रचनाओं का सस्वर गायन बच्चों ने किया। शिविर में बी किशोर और रोहित रेड्डी, गौरी परांजपे ने तीन अलग-अलग नृत्य का और शानिद अहमद, चित्रांश श्रीवास्तव, कविता पटेल, ऋषभ सिंह द्वारा निकिता सिंह, नरेंद्र पटनारे, जे श्रीनू, सोम साहू, उत्तम साव, हिना कुमारी, समीर शर्मा, स्पर्श शर्मा, चारु श्रीवास्तव के सहयोग से चार नाटकों का पूर्वाभ्यास प्रारंभ किया। वेणु प्रिया द्वारा बच्चों को पेंटिंग और अनुपयोगी वस्तुओं से छोटी, छोटी कलाकृति बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।