भिलाई। दुर्ग जिले की यह गौशाला पूरे देश की गौशालाओं को आईना दिखाती है। यहां गायों के लिए ऐसी सुविधाएं हैं कि आप दांतों तले अंगुली दबा लें। यहां की गाएं कनाडा के स्‍पेशल गद्दे पर आराम करती हैं। उनके रहने-खाने और पीने के साथ ही दूसरी ऐसी तमाम सुविधाएं कि आप दंग रह जाएं। यह कमाल की गौशाला स्थित है दुर्ग जिले में।

दरअसल, जल, जंगल, जमीन, गाय, गोमूत्र, गोबर तथा खेत खलिहान बचाने के लिए एक दशक पहले एक महाभियान शुरू किया गया। इसके पीछे एक सपना था भारतीय नस्ल की गाय को बचाने का। ऐसा माना जाता है कि देशी नस्ल की गाय का दूध ही अमृत है। उसके गोमूत्र में कई असाध्य रोगों का इलाज है। उसके गोबर में पाए जाने वाले पोटाश से बनी जैविक खाद खेतों के लिए वरदान है।

इसी सोच के साथ खोली गई इस अत्याधुनिक गोशाला के प्रबंधक शिरीष भाई टॉक बताते हैं कि जिस तेजी से देशी नस्ल की गाय विलुप्त हो रही हैं, जिस तेजी से फास्‍फोरस यूरिया का इस्तेमाल कर खेतों को बंजर किया जा रहा है, हाईब्रिड फसल, फल लेकर लोगों के भीतर जहर उड़ेला जा रहा है उससे बचने का एकमात्र उपाए हैं देशी नस्ल की गाय। इस सोच ने ही इस गोशाला को जन्म दिया, एसआरटी एग्रो साइंस प्राइवेट लिमिटेड।

दुर्ग जिले के पाटन विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत फुंडा गांव के पास 110 एकड़ में फैले विशाल फार्म हाउस में है यह गोशाला। जहां चार एकड़ में अत्याधुनिक गोशाला तथा लैब है तो बाकी के 106 एकड़ में खेती होती है। ज्यादातर खेती गाय के लिए चारा उगाने के लिए होती है।

इस गोशाला में करीब चार सौ गीर गाय हैं। गुजरात की विश्व प्रसिद्ध गीर गाय को कनाडा से मंगाए गए गद्दों पर रखा जाता है। यह स्पंजीय गद्दे एंटी फंगस व एंटी बैक्टीरिया हैं। गाय द्वारा मूत्र त्यागते ही गद्दे सूख जाते हैं और मूत्र नाली में बह जाता है। गद्दे पर बैठने से गाय की पाचन क्रिया ठीक रहती है तथा अक्सर गायों में पाए जाने वाली थन व खुर की बीमारी नहीं होती। इस अत्याधुनिक गोशाला में गायों को पूरी सुविधा के साथ रखा जाता है। इस विशाल गोशाला में एक मक्खी या मच्छर दिखाई नहीं देते।

गुंबदनुमा है गोशाला का शेड

गोशाला के विशाल शेड को गुंबदनुमा बनाया गया है ताकि सुबह सूर्योदय तथा शाम को सूर्यास्‍त की किरणें गायों के मस्तक पर पड़ें। इससे गाय में सकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है। यही वजह है कि गाय का दूध अमृत हो जाता है तथा इसके गोबर में पोटाश की मात्रा पाई जाती है। यहां हर गाय सुबह शाम मिलाकर आठ से दस लीटर दूध देती है। यहां मशीन के माध्यम से दूध निकाला जाता है। रोजाना सात से आठ सौ लीटर दूध को मार्केट में सप्लाई किया जाता है।

बछड़ों के लिए मैदान

यहां गायों के बछड़ों के लिए ग्राउंड बनाया गया है। यहां बछड़े उछलकूद मचाते रहते हैं, इसके लिए उन्‍हें पूरा माहौल दिया गया है।

पानी के लिए साइफन सिस्टम

यहां साइफन सिस्टम बनाया गया है। हर गाय के आगे एक छोटी सी पानी की टंकी। गाय जितना पानी पीते हैं उतना पानी फिर भर जाता है। चारा भी हरा व ताजा ही खिलाया जाता है। विदेशी गद्दे से लगाकर नाली बनाई गई है, जिससे गोमूत्र तथा गोबर नाली के माध्यम से एक टैंक में चला जाता है।