भिलाई। स्वाइन फ्लू को लेकर खतरा और बढ़ गया है। महामारी फैलाने वाले सूअर भी अब इसकी गिरफ्त में आकर दम तोड़ रहे। भिलाई टाउनशिप में दो-तीन सूअरों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। मौत का कारण, सूअरों में स्वाइन फ्लू का वायरस प्रवेश करना बताया जा रहा है।

पहले सूअर में ही वायरस पनपता है, फिर हवा के माध्यम से इंसानों को अपनी चपेट में लेता है। खतरनाक बात यह है कि टाउनशिप में जहां स्वाइन फ्लू के मरीज मिले, उसी इलाके या आसपास के क्षेत्र में 10 दिनों में 30 सूअरों की मौत हो चुकी है। मामला इतना संवेदनशील होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने मृत सूअरों का पोस्टमार्टम तक नहीं कराया।

स्वाइन फ्लू का सबसे पहला केस सेक्टर-6 अनफिट ब्लॉक में से आया था। रामजीत प्रसाद गुप्ता की मौत हुई थी। इसके दो दिन के भीतर ही इसी अनफिट ब्लॉक में एक सूअर ने दम तोड़ दिया। इसी तरह रुआबांधा के 191-बी में रहने वाली दीपंती दास स्वाइन फ्लू की चपेट में आई।

इनके घर के पास ही सूअर की मौत हुई। सेक्टर-1 के एवेन्यू 25-1 में रहने वाले अनिल सिंह भी स्वाइन फ्लू से बीमार हुए। अब ठीक हैं, लेकिन इनके मकान के परिसर में ही सूअर की मौत ने सबको दहशत में डाल दिया। इसी तरह अब तक करीब आठ ऐसे केस सामने आए हैं, जहां से स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीज मिले। पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट का कहना है कि रोज दो-तीन सूअर मरने की सूचना आ रही है। इसका निस्तारण किया जा रहा है।

सूअरों के मरने के आंकड़ों और अब तक अधिकारिक पुष्टि न होने पर जिला चिकित्सालय के पशु रोग विशेषज्ञों का कहना है कि फौरन पोस्टमार्टम कराना चाहिए। मामला, गंभीर हो सकता है। सूअरों में पहले स्वाइन की बीमारी होती है। यह महामारी की तरह होती है। एक साथ मौत का आंकड़ा भी बढ़ता है।

पोस्टमार्टम कराने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। दुर्ग में अब तक कोई रिपोर्टिंग नहीं है। भिलाई टाउनशिप में अगर, केस सामने आ रहे हैं तो बीएसपी प्रबंधन को अलर्ट हो जाना चाहिए। भिलाई का एरिया सुपेला लाल बहादुर शास्त्री शासकीय अस्पताल के अंडर में आता है। इन्हें भी सतर्कता बरतनी चाहिए।

सूअरों को स्वाइन फ्लू आदिकाल से

सवाल के जवाब में सर्जन का का कहना है कि पहले सूअर में स्वाइन फ्लू होता था। अब मानव में अटैक कर रहा है। आदि काल से यह सूअरों में होता है। वैकसीन लगाने से सूअरों में नियंत्रण रहता है। पिछले साल लगा था टीका। देशभर में फैले स्वाइन फ्लू के प्रकोप के बीच अगर, भिलाई से सूअरों के मरने की बात सामने आ रही है तो इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है। जांच-पड़ताल करके स्थिति को स्पष्ट कर लेनी चाहिए।

घर-घर स्वाइन फ्लू पनपने का मौका दे रहा बीएसपी

टाउनशिप के 29 हजार घरों की बैक लाइन जाम है। 20 हजार घर के अंदर के चेम्बर के ढक्कन खुले हैं या टूटे हैं। हजार से ज्यादा बैकलाइन पर कवर नहीं है। नालियां जाम और जल निकासी का कोई इंतजाम नहीं है। नगर सेवाएं विभाग की जिम्मेदारी है कि वह इसका पूरा इंतजाम करे लेकिन टेंडर के नाम पर अब तक टाल-मटोल ही होता रहा है।

घरों के अंदर का सीवर ओवर फ्लो होकर बाहर बहता है। गंदगी की वजह से यहां सूअरों को ठंडक मिलने और भोजन मुहैया हो जाता है। इससे बीमारियां पनपना शुरू होती है, जो बीएसपी कर्मचारियों के साथ टाउनशिप में रहने वालों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। पीएचई की इसी हरकतों के कारण बीएसपी कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और गुस्सा भड़क रहा है।

सूअर माफिया के आगे प्रबंधन नतमस्तक

भिलाई टाउनशिप में सूअर पालन करने वालों के आगे बीएसपी प्रबंधन भी नतमस्तक हो चुका है। नगर सेवाएं विभाग अब तक सूअर पकड़ने का ठेका तक नहीं दिया है। इसकी स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है। पिछले दिनों इंटक पदाधिकारियों से प्रबंधन ने गुमराह करने वाला जवाब दिया।

दावा किया गया था कि भिलाई निगम से एग्रीमेंट किया जा चुका है। सूअर निगम ही पकड़वाएगा। सच्चाई यह है कि टेंडर सहित अन्य प्रक्रिया की फाइल नगर सेवाएं विभाग में स्वीकृति के लिए धूल फांक रही है। कर्मचारियों ने टाउनशिप के सूअर पालन करने वालों की लिस्ट प्रबंधन को दे दी है लेकिन अब तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।

स्वाइन फ्लू से सूअरों की मौत संभव

मौत का कारण क्या है, पहले इसकी जांच करनी होगी। ब्लड सैंपल लेकर काफी हद तक किसी नतीजे तक पहुंचा जा सकता है। साथ ही मरने वाले सूअरों का पोस्टमार्टम भी कराना चाहिए। सूअरों के मरने के मामले को हल्के में नहीं लेना चाहिए। जांच करके सच्चाई सामने लाना होगा। - डॉ. आरके गुप्ता, वेटनरी सर्जन, जिला चिकित्सालय-दुर्ग

जरा डीजीएम साहब का जवाब तो पढ़िए...

बैकलाइन की वजह से स्वाइन फ्लू नहीं होता। यह छुने और छींकने आदि कारणों से फैलता है। बैकलाइन के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। मैं खुद दिन-रात एक करके जल्द से जल्द बैकलाइन का काम कराने में जुटा हूं। मैं तो अपना काम कर रहा हूं। लेकिन जिन्हें अपना काम करना है, वह कहां हैं। सूअर को पकड़ने की जिम्मेदारी किसकी है?

बैकलाइन के नाम पर हमारे ऊपर आरोप मढ़ दिया जाता है। लोग गलत आरोप मढ़ देते हैं। बैकलाइन के लिए कांट्रैक्ट हो रहा है। मैं पीछे लगा हूं, जल्दी काम कराऊंगा। फॉगिंग नहीं होता, मच्छर भर गया है। टाउनशिप में कुछ नहीं हो रहा है। मच्छर मारने की दवाई कहां छिड़कते हैं। सूअर पकड़ने का कांट्रैक्ट कहां है? कुत्ता पकड़ने का ठेका कहां है? - एसएन सतपति, डीजीएम-पीएचई, बीएसपी