बीजापुर। नईदुनिया न्यूज

लंबे अरसे बाद एक फिर से बीजापुर जिले में जवानों पर फर्जी मुठभेड़ को अंजाम देने का आरोप लगाया गया है परन्तु इस बार ग्रामीणों ने नहीं बल्कि माओवादियों ने यह आरोप सुरक्षा बलों पर लगाया है। गंगालुर रिया कमेटी के सचिव दिनेश मोडियम ने प्रेस नोट जारी कर आरोप लगाया है कि गस्त के दौरान डीआरजी और सीआरपीएफ के जवानों ने गंगालुर थाना क्षेत्र के बुरगिल गांव में खेत जा रहे ग्रामीण पूनेम सोनू और कमकानार गांव में हेमला रघु को जिन्दा पकड़ने के बाद फर्जी मुठभेड़ में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। जारी प्रेस नोट में माओवादी नेता ने पालनार के नक्सली जनअदालत में ग्रामीण की हत्या के खबर का खंडन करते हुए कहा है कि उनके द्वारा किसी की हत्या नहीं की गयी बल्कि जनअदालत में पुलिस मुखबिरों को समझाइस देकर छोड़ दिया गया था,परन्तु पुलिस द्वारा मीडिया में इसकी झूटी अफवाह फैलाई गयी थी,वंही माओवादियों ने यह भी आरोप लगाया है कि 25 नवम्बर को गस्त के दौरान बुरगिल गांव से जवानों द्वारा खेत की रखवाली के लिए सोये हुए 12 ग्रामीण पोटाम सुक्कुपोटाम अर्जुन, पूनेम साईं, हेमला सोमलू, पुनेम सोमु, पूनेम मोंटू, हेमला लछू, पूनेम छोटू, पोटाम जयकुमार, पुनेम सुखलाल और पोटाम पाकलू,को रात 2 बजे उठाकर ले गयी थी और 9 के स्कूली छात्र जयकुमार समेत 4 ग्रामीणों के साथ बेरहमी से मारपीठ करने के बाद छोड़ दिया गया और 8 ग्रामीणों को अभी भी थाने में ही बंदी बनाकर रखा गया था,माओवादी नेता ने थाने में रखे गए सभी 8 ग्रामीणों को रिहा करने की मांग करते हुए मीडिया में उनके खिलाफ झूठा प्रचार न करने की हिदायत भी दी है।