बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

बिलासपुर शहर को अपना नाम देने वाली बिलासा की प्रतिमा पर भाजपाध्यक्ष अमित शाह ने माल्यापर्ण कर पिछड़ा वर्ग के लोगों को राजनीतिक रूप से संदेश देकर चले गए ।

भाजपाध्यक्ष के बिलासपुर प्रवास के लिए जारी मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम में बिलासा प्रतिमा पर माल्यार्पण का कार्यक्रम भेजा गया था। जिला भाजपा के अलावा दिग्गज भाजपाई इसकी तैयारी में पहले ही लग गए थे। लिहाजा नगर निगम ने बिलासा की प्रतिमा का रंगरोगन के अलावा चौक व आसपास के क्षेत्र को चकाचक कर दिया था। शनिवार 13 अक्टूबर को श्री शाह सुबह 10.45 बजे होटल कोर्टयार्ड मेरियट से सीएम डॉ.रमन सिंह,प्रदेशाध्यक्ष धरमलाल कौशिक,राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पांडेय व नगरीय प्रशासन मंत्री अग्रवाल के साथ बिलासा चौक की तरफ कूच किया। चौक पहुंचने के बाद उन्होंने व सीएम डॉ. सिंह ने बिलासा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। लोगों से मुलाकात की व चकरभाठा एयरपोर्ट की तरफ रवाना हो गए।

सोशल इंजीनियरिंग का खेला दांव

इतिहास के पन्नों में बिलासा के बारे में यही कहा जाता है कि वे पिछड़ा वर्ग से आती हैं। मछुआरिन थी। ओबीसी वर्ग से ताल्लुक रखने के कारण अब इस बात की चर्चा भी जोर पकड़ने लगी है कि शाह ने बिलासपुर शहर को अपना नाम देने वाली बिलासा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सोशल इंजीनियरिंग के साथ ही शहरवासियों को भी संदेश दे गए ।

अमर ने दिया फिर आने का न्योता

मंत्री अमर अग्रवाल ने भाजपाध्यक्ष शाह को बिलासपुर आने का न्योता दिया । मंत्री के कंधे पर हाथ रखकर कहा अमर भाई मिलते हैं। उसके बाद रवाना हुए ।

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बिलासा चौक पहुंचते ही भाजपाध्यक्ष ने प्रोटोकॉल तोड़कर शहरवासियों से मुलाकात की । लोगों से मिलते रहे व हालचाल जानते रहे ।

बिलासा जिन्होंने बिलासपुर को दी नाम

महानगर की ओर डग भर रहे बिलासपुर शहर को बिलासा केंवटिन ने बसाया था। इतिहास व कथा साहित्य में बिलासपुर की बसाहट 1560 में होना दर्शित है। बिलासपुर को पहचान देने वाली बिलासा केंवटिन की स्मृतियों को संजोने वर्ष 2000 में शनिचरी में बिलासा की काल्पनिक प्रतिमा बनाई गई। मूर्ति आकर्षक है। इसकी प्रतिकृति छत्तीसगढ़ भवन बिलासपुर में भी लगाई गई है।

डॉ.पालेश्वर शर्मा ने लिखा कि बिलासा के संबंध में कोई प्रमाणिक तथ्य उपलब्ध नहीं है, इसलिए इतिहास जानने लोक साहित्य और पुरातत्व का सहारा लिया जाता है। छत्तीसगढ़ी साहित्य, लोक कथा, लोक गीतों में बिलासा का वर्णन है। एक लोक गाथा के मुताबिक दिल्ली में गोपालराय एवं बिलासा केंवटिन के शौर्य प्रदर्शन से खुश होकर सम्राट जहांगीर ने उन्हें पुरस्कृत किया। साहित्यकार एवं पुराविद् बाबू प्यारेलाल गुप्त ने रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा प्रकाशित ग्रंथ प्राचीन छत्तीसगढ़ में बिलासा का जिक्र किया है। गजेटियर में लिखा है कि वर्ष 1861 तक बिलासपुर एक छोटा सा गांव था, मात्र कुछ झोपड़ियां थी। इसमें बिलासा केंवटिन की भी झोपड़ी थी। बिलासा का जन्म अरपा के तट पर जूना बिलासपुर स्थित केंवटपारा में हुआ, जो रतनपुर के कल्चुरी राजा कल्याणसाय के दरबारियों में एक सम्मानित सदस्य थी।

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