बिलासपुर। साल 2008 में गीतांजली एक्सप्रेस को हाईजैक कर एक आइएएस अफसर का अपहरण करने के मामले में तोरवा पुलिस ने फरार वारंटी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। पुलिस की टीम लगातार स्थाई और अस्थाई वारंटियों की पतासाजी कर उन्हें गिरफ्तार कर रही है। तोरवा थाने में वर्ष 2008 में हुए अपहरण के मामले में लिंगियाडीह निवासी संजय दुबे पिता राजकुमार दुबे के खिलाफ भी गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था।

पुलिस ने उसके वारंट के आधार पर तस्दीक की, तब पता चला कि उसने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर आईएएस अफसर शशांक शेखर का अपहरण किया था। आईएएस अफसर गीतांजलि एक्सप्रेस में मुंबई से हावड़ा जा रहे थे।

इस दौरान आरोपित युवक भी ट्रेन में सफर कर रहे थे। तभी आईएएस अफसर से उन्होंने दुर्व्यवहार कर दिया। बात बढ़ने पर ट्रेन के बिलासपुर से आगे निकलने के बाद उन्होंने लालखदान में चेन पुलिंग की और आईएएस अफसर को उतार लिया।

इस बीच तोरवा थाने की पेट्रोलिंग टीम ने उन्हें पकड़ लिया। इस दौरान लिंगियाडीह निवासी आरोपित संजय दुबे मौका पाकर फरार हो गया। पूछताछ के दौरान जैसे ही पता चला कि अपहृत युवक आईएएस अफसर हैं, तब पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए।

इस मामले में दो आरोपितों को कोर्ट से सजा हो चुकी है और दोनों जमानत पर है। इसी आधार पर फरार आरोपित संजय ने भी जमानत ले लिया। लेकिन, इसके बाद से वह पेशी से गायब रहा।

पुलिस अफसरों में मच गया था हड़कंप

इस घटना के समय 2008 में आरोपितों को पकड़े जाने के बाद आईएएस अफसर ने जैसे ही अपना परिचय दिया पुलिसकर्मियों के हाथ पांव फूल गए। उन्होंने आला अधिकारियों को इस घटना की जानकारी दी। आईएएस अफसर के अपहरण की सूचना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था।