बिलासपुर(निप्र)। भीख मंगाने के लिए 7 साल की बच्ची का अपहरण करने के मामले में सुनवाई पूरी कर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को 7 वर्ष का कठोर कारावास एवं 500 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। आरोपी ने 6 मार्च 2015 को वारदात को अंजाम दिया था। 9 जून को आरोपी को आरोप पत्र दिया गया। एक माह से भी कम समय में 6 जुलाई को 9 गवाहों का प्रतिपरीक्षण कर आरोपी को सजा सुनाई गई।

सरकंडा थाना क्षेत्र के राजीव नगर चिंगराजपारा निवासी लक्ष्मीन बाई शर्मा पति रामसेवक शर्मा की 7 वर्षीय पुत्री सरस्वती शर्मा 6 मार्च 2015 की शाम गायब हो गई थी। घर से खेलने के लिए निकली बच्ची की देर तक वापस नहीं लौटने पर माता-पिता ने तलाशी शुरू की। कहीं भी पता नहीं चलने पर बच्ची की माता-पिता ने मोहल्ले में दुकान चलाने वाली सुधा साहू के पास गए।

इस पर सुधा साहू ने उन्हें बताया कि पहले उनके मकान में किराया पर रहने वाला धरमवीर उर्फ धरमा दुकान आया था। उसने घर में पीतल की घंटी छूटने की बात कहते हुए घंटी मांगी। इस पर सुधा साहू ने घर से लाकर उसे घंटी दिया। जब वह दुकान आया तो बच्ची दुकान के बाहर खेल रही थी। उसने बताया कि धरमा ने बच्ची को घंटी बजवाते हुए सब्जी मंडी की ओर ले गया। बच्ची का अपहरण होने की जानकारी होने पर लक्ष्मीन बाई शर्मा ने रात 9 बजे सरकंडा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में बच्ची से भीख मंगवाने या हत्या किए जाने की आशंका व्यक्त की गई। पुलिस ने तत्पराता दिखाते हुए सब्जी मंडी के पास राज बहादुर की मकान में किराया पर रहने वाले आरोपी के घर छापा मारा। आरोपी ने बच्ची को ऊपर के कमरे में बंद करके रखा था। सरकंडा पुलिस ने प्रकरण में धरमवीर उर्फ धरमा पिता राजदास कश्यप (36) निवासी बहदीनपुर जिला मैनपुरी यूपी को धारा 363 ए एवं 364 के तहत गिरफ्तार कर 7 मार्च को जेल जेल दाखिल किया। सरकंडा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ 23 मई को न्यायालय में चालान पेश किया। मामले की जिला एवं सत्र न्यायाधीश महादेव कातुलकर की अदालत में सुनवाई हुई। उन्होंने इस गंभीर अपराध में रिकार्ड समय में सुनवाई पूरी की। चालान पेश होने के बाद मामले में अगली सुनवाई 29 मई को रखा गया। आरोपी के खिलाफ 9 जून को आरोप तय किया गया। आरोप तय होने के बाद मामले में 9 गवाहों का 2, 3, 4 एवं 6 जुलाई को लगातार प्रतिपरीक्षण कर आरोपी को सजा सुनाई गई। न्यायालय ने आरोपी को बच्ची से भीख मंगाने के लिए अपहरण करने के आरोप में धारा 363 ए में 7 वर्ष का कठोर कारावास एवं 500 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं पटाने पर अभियुक्त को 1 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

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सजा में नरमी न्याय हित में अनुचित

आरोपी के अधिवक्ता ने सजा में नरमी बरते जाने का निवेदन किया। इस पर न्यायालय ने कहा कि सुकुमार अवस्था अथवा किशोर अवस्था के बच्चों का अपहरण अनुचित प्रयोजन के लिए किया गया। राज्य में बालिकाओं को बहला फुसलाकर ले जाकर अन्य राज्य में विक्रय करने और भीख मंगाने की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए आरोपी के प्रति नरमी बरतने को अनुचित माना।

कुल्फी खिलाने का बहान कर अपहरण किय था

अपहृत बच्ची ने अदालत को बताया कि वह खेल रही थी, उसी समय आरोपी ने कुल्फी खिलाने की बात कही इसके बाद उसके हाथ में घंटी देकर बजवाते हुए अपने घर ले जाकर बंद कर दिया था। रात को मां एवं पिता ने उसे कमरे से बाहर निकाला। न्यायालय ने बच्ची के इस बयान को महत्वपूर्ण माना है। आरोपी कुल्फी बेचने का काम करता था।