बिलासपुर। नईदुनिया न्यूज

जोनल स्टेशन में मंगलवार सुबह ऑटो चालकों व आरपीएफ के बीच जमकर विवाद हो गया। उन्हें सबक सिखाने के लिए आरपीएफ के 60-70 जवान पहुंच गए। इससे जोनल स्टेशन छावनी में तब्दील हो गई। जवानों को देखकर चालक चक्काजाम की धमकी देते तोरवा थाने पहुंच गए। उन्होंने आरपीएफ पर दुर्व्यवहार की शिकायत की लेकिन यहां उनकी सुनवाई नहीं हुई।

जानकारी के मुताबिक गेट नंबर 4 पर कुछ चालक सवारी लेने के चक्कर में घुस गए। इतना ही नहीं ऑटो गेट के सामने बेतरतीब ढंग से खड़ी कर दी गई थी। इस दौरान आरपीएफ के जवान ने चालकों को बाहर जाने और गेट के सामने ऑटो को व्यवस्थित करने के लिए कहा। इस बीच ऑटो चालक उनकी बात को अनसुना कर दिया। इस बीच झूमाझटकी भी हुई। जवान ने इसकी जानकारी आरपीएफ पोस्ट को दी। इसके बाद पोस्ट में तैनात सारे अधिकारी व स्टॉफ गेट नंबर 4 पर पहुंच गए। तब तक चालक एकजुट होकर खड़े थे। 30-40 की संख्या में ऑटो चालकों को देखकर आरपीएफ पोस्ट के अधिकारी आक्रोश में आ गए। इसकी नतीजा यह हुआ कि थोड़ी देर में 60-70 की संख्या में आरपीएफ के जवान जिस स्थिति में थे स्टेशन में पहुंच गए। आरपीएफ की संख्या अधिक देखकर ऑटो चालक यह कहते हुए पीछे हट गए कि चौक पर चक्काजाम किया जाएगा। उनकी यह बात सुनकर जवान उनके साथ-साथ पहुंच गए। हालांकि चक्काजाम नहीं हुआ। ऑटो चालक आरपीएफ की शिकायत करने के लिए तोरवा थाने पहुंच गए। लेकिन उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई।

कुली कर चुके हैं लिखित शिकायत

जोनल स्टेशन के कुली भी ऑटो चालकों की हरकतों से बेहद परेशान हैं। उन्होंने स्टेशन प्रबंधक के पास लिखित में उनकी शिकायत की है। इसमें इस बात का उल्लेख है कि यात्रियों को ऑटो में बैठाने की होड़ में वे यात्रियों के बैग को उठा लेते हैं और सीधे ऑटो में रख देते हैं। इस स्थिति में यात्री उनकी ऑटो में बैठने के लिए विवश हो जाते हैं। कुलियों का कहना है कि उनकी इस हरकत से हमारा व्यवसाय प्रभावित होता है।

प्रीपेड बूथ योजना ठंडे बस्ते में

जोनल स्टेशन के सामने ऑटो पार्किंग को व्यवस्थित करने के लिए पिछले दिनों यातायात व परिवहन विभाग ने गंभीरता दिखाई। अधिकारी प्रीपेड बूथ को स्थापित करने के लिए रेलवे पहुंचे। उन्होंने सीनियर डीसीएम से इस संबंध में चर्चा की और जगह देने के लिए कहा। सीनियर डीसीएम ने हामी भर दी है। आपसी सहमति के बाद माना जा रहा था कि बहुत जल्द बूथ अस्तित्व में आ जाएगा। लेकिन योजना ठंडे बस्ते में चली गई। स्थिति आज भी पहले की तरह है।