नई दिल्ली / बिलासपुर(एजेंसी)। स्वच्छ भारत की दिशा में छत्तीसगढ़ के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है। भारतीय रेलवे के मुताबिक, सूरत और राजकोट क्रमशः देश के दो सबसे साफ-सुथरे रेलवे स्टेशन हैं। जबकि छत्तीसगढ़ का बिलासपुर तीसरे स्थान पर है। वहीं मुगलसराय (उप्र) तथा पुणे सबसे गंदे स्टेशनों में हैं।

सूरत और राजकोट को पिछले महीने शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने भी सम्मानित किया था। दोनों शहरों को 'स्वच्छता सर्वेक्षण 2016' के तहत पश्चिमी जोन में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और ठोस कचरे के निस्तारण की श्रेणी में श्रेष्ठतम व्यवस्था के लिए चुना गया था। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने गुरुवार को आईआरसीटीसी और टीएनएस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किए सर्वेक्षण के नतीजे जारी किए।

सर्वेक्षण में 16 जोन के 407 रेलवे स्टेशनों को लेकर लोगों से स्वच्छता से जुड़े विभिन्न मानकों पर प्रश्न पूछे गए। 60 करोड़ रुपए सालाना की आय वाले ए1 श्रेणी के 75 रेलवे स्टेशनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का स्थान 65वां रहा। हालांकि वाराणसी-रायपुर, मुजफ्फरपुर, भोपाल, कानपुर सेंट्रल, सियालदह और गुवाहाटी स्टेशनों से सफाई के मामले में बेहतर है। ए1 श्रेणी में बिलासपुर, सोलापुर, मुंबई सेंट्रल, चंडीगढ़, भुवनेश्वर, मदुरै और न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों का प्रदर्शन श्रेष्ठ रहा।

रेल मंत्री प्रभु ने कहा कि यह सर्वेक्षण 'स्वच्छ रेल, स्वच्छ भारत अभियान' के तहत कराया गया। इसका उद्देश्य स्टेशन परिसर में सफाई को लेकर यात्रियों को संतुष्ट करना है। प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की तर्ज पर रेलवे ने यह अभियान चलाया है। रेल मंत्रालय 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती से पहले स्टेशन परिसरों में पूर्ण स्वच्छता का लक्ष्य हासिल करना चाहता है।

तीन पाली में150 कर्मचारी करते हैं सफाई

जोनल स्टेशन की सफाई 150 कर्मचारियों से तीन पालियों में कराई जाती है। यहां 8 प्लेटफार्म हैं। इनमें सुबह से लेकर रात ट्रेनों का दबाव रहता है। सुबह अधिक ट्रेनें पहुंचती है। इसलिए इस समय में 60 से 70 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है। दूसरी पाली में संख्या कम और रात में 20 से 30 कर्मचारी प्लेटफार्म को साफ करते हैं। यहां सफाई ठेके पर है। निजी कर्मचारी होने के कारण स्टेशन प्रबंधक (राजपत्रित), स्टेशन प्रबंधक के अलावा सीएचआई भी सफाई की निगरानी करते हैं।

हर शिफ्ट में एक हेल्थ इंस्पेक्टर की ड्यूटी इसीलिए लगाई जाती है ताकि वह सफाई कर्मचारियों पर नजर रख सके। इसके अलावा अफसरों द्वारा भी समय- समय एसआईजी निरीक्षण कर मॉनिटरिंग की जाती है। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर जो कमियां सामने आती हैं उसे दूर करने की लिए योजना बनती है। सफाई को लेकर बरती जा रही गंभीरता का परिणाम है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन का बिलासपुर स्टेशन ने तीसरा स्थान अर्जित किया है।

स्क्रवर ड्रायर व जेड मशीन का उपयोग

जोनल स्टेशन के स्वच्छ रहने की एक वजह मशीनों के उपयोग को माना जा सकता है। प्लेटफार्म को चकाचक रखने के लिए स्क्रवर ड्रायर मशीनें हैं। इसके जरिए पोंछा होने के बाद न तो प्लेटफार्म में गिला रहता है और न ही यात्रियों के चप्पल- जूते के धब्बे पड़ते हैं। मशीन के नीचे दो ब्रश लगे हैं। दोनों काम प्लेटफार्म की गंदगी खींचकर प्लेटफार्म को चकाचक करना है। इसके अलावा जेड मशीन से सफाई की जाती है। इस मशीन से ट्रैक की गंदगी की साफ की जाती है।