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    बिना आधार नंबर नहीं मिलेगी जमानत : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

    Published: Sun, 07 Jan 2018 04:02 AM (IST) | Updated: Sun, 07 Jan 2018 09:40 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    बिलासपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाईकोर्ट ने फर्जी दस्तावेज से जमानत लेने के मामलों को रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। अब जमानतदार को प्रतिभूति के साथ आधार नंबर भी देना होगा। कोर्ट दस्तावेज व आधार कार्ड की जांच के बाद रिहाई आदेश जारी करेगा।

    जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने एमसीआरसी 439 के तहत प्रस्तुत होने वाले जमानत आवेदन पर जमानतदार व आरोपी का यूआईएन आधार नंबर अनिवार्य किया है। अब ट्रायल कोर्ट में जमानत दस्तावेज के साथ आधार कार्ड की फोटोकॉपी लेनी अनिवार्य है। न्यायाधीश एक सप्ताह के अंदर राजस्व दस्तावेज, आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज का परीक्षण करेंगे। इसके बाद ही आरोपी की जेल से रिहाई का आदेश जारी होगा। आदेश में कहा गया है कि गलत दस्तावेज या आधार नंबर प्रस्तुत करने वाले के खिलाफ 4 सप्ताह में एफआईआर दर्ज करानी होगी। इसके लिए सभी कोर्ट में एक इलेक्ट्रॉनिक डाटाबेस रजिस्टर रखना होगा।

    इसमें केस नंबर, क्राइम नंबर, आरोपी और पुलिस स्टेशन का विवरण होगा। जस्टिस मिश्रा ने रजिस्ट्रार जनरल को आदेश की प्रति सभी जिला न्यायाधीशों को भेजने और जिला एवं सत्र न्यायाधीश को अपने अधिनस्थ न्यायाधीश, सिविल जज को भेजने के निर्देश दिए हैं। इसी प्रकार आदेश की प्रति कलेक्टर के माध्यम से पुलिस अधीक्षक व एसपी द्वारा सभी थानों को भेजने के लिए कहा है। इसका पालन नहीं करने वाले न्यायाधीश, सिविल जज के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।

    एक पट्टा सिर्फ दो प्रकरण में होगा पेश

    हाईकोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार अब एक पट्टे पर दो से अधिक जमानत नहीं मिलेगी। इससे जमानत लेने का धंधा करने वालों पर रोक लगेगी। दस्तावेज की जांच के लिए राजस्व अधिकारी व पुलिस को न्यायालय का सहयोग करने का आदेश दिया गया है।

    क्या है मामला

    दुर्ग निवासी वेदप्रकाश गुप्ता ने विशेष न्यायाधीश दुर्ग की अदालत में एक आरोपी की जमानत लेने नीलकंठ पिता सुकुल दास निवासी इंदवानी के नाम का राजस्व दस्तावेज पेश किया था। दस्तावेज को तहसीलदार के पास जांच के लिए भेजा गया। तहसीलदार ने बताया कि जिस व्यक्ति के नाम का दस्तावेज पेश किया गया वह इंदवानी में रहता ही नहीं है। इसके बाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

    आरोपी एक अधिवक्ता का क्लर्क निकला। धारा 420, 467, 468, 471 व 120 बी के तहत अपराध पंजीबद्घ कर 31 दिसंबर 2016 को उसे गिरफ्तार किया गया। एक वर्ष बाद हाईकोर्ट ने आरोपी को 25 हजार रुपए की सक्षम प्रतिभूति प्रस्तुत करने पर जमानत में छोड़ने का आदेश दिया है। इसी मामले के साथ जमानत को लेकर दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।

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