बिलासपुर। बिलासपुर संभाग में भाजपा के बूथ मैनेजमेंट को कांग्रेस और विपक्षी दलों की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। जकांछ और बसपा के गठजोड़ के बाद संभाग के राजनीति समीकरण में बड़ा बदलाव आया है। भाजपा को पहले से चुनौती दे रही कांग्रेस अब आक्रामक हुई है, तो गठजोड़ संभाग की सभी सीटों पर असर डालता नजर आ रहा है। ऐसे में अब यहां की सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष नजर आ रहा है।


कड़े संघर्ष के आसार

बिलासपुर जिले की सात विधानसभा सीटों पर नजर डालें तो बिल्हा विधानसभा क्षेत्र ऐसा है, जहां के मतदाता प्रयोगधर्मी रहे हैं। हर पांच साल में अपना जनप्रतिनिधि बदलने में भरोसा रखते हैं। वर्तमान में यह सीट कांगे्रस के कब्जे में है। विधायक सियाराम कौशिक की राजनीतिक प्रतिबद्धता जकांछ सुप्रीमो अजीत जोगी के साथ है।

कांग्रेस में दावेदारों की फौज के बीच प्रदेश भाजपाध्यक्ष धरमलाल कौशिक को कड़े सघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। जोगी कांग्रेस के चुनाव मैदान में उतरने से कोटा व मरवाही विधानसभा सीटों को अपवाद स्वरूप छोड़ दें तो अन्य सीटों पर भाजपा के लिए अनुकूल राजनीतिक माहौल बनने लगा है। कोटा में आजादी के बाद से लेकर अब तक हुए चुनावों में मतदाताओं ने कांगे्रस पर भरोसा किया है।

त्रिकोणीय संघर्ष में फंसा जांजगीर-चांपा जिला

जांजगीर-चांपा जिले को बहुजन समाज पार्टी का गढ़ माना जाता है। जनता कांग्रेस जोगी के साथ गठबंधन के बाद बसपा की स्थिति और भी मजबूत हो गई है। पामगढ़, चंद्रपुर में भाजपा विधायक है और इनकी सक्रियता को संगठन परख रहा है। यहां भाजपा और कांग्रेस के पुराने चेहरे की जगह नये चेहरे पर लाभ मिलने की संभावना नजर आ रही है।

बदल रहा रायगढ़ का समीकरण

रायगढ़ जिले में बसपा जकांछ गठबंधन तीन सीटों पर भाजपा व कांग्रेस की संभावनाओं पर पानी फेर सकता है। जिले में विधानसभा की पांच सीटे हैं। इनमें धरमजयगढ़ और लैलूंगा में जकांछ और बसपा की मिलीजुली ताकत नया परिणाम लेकर सामने आए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। खरसिया परंपरागढ़ स्र्प से कांग्रेस का गढ़ माना जाता है।

कोरबा में कांग्रेस-भाजपा तू डाल-डाल तो मैं पात-पात

कोरबा जिले में चार विधानसभा सीट हैं। वर्ष 2008 में तीन कांग्रेस तो एक भाजपा के कब्जे में रही थी सीट । वर्ष 2013 में स्थिति पलट गई। भाजपा तीन व कांग्रेस एक सीट पर सिमट गई। बसपा-जकांछ के गठबंधन के बाद कोरबा में असर की संभावना देखी जा रही है।