बिलासपुर। छाती में दर्द होने पर उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचा मरीज एक घंटे तक दर्द से कहराता रहा। परिजन उसे लेकर आपातकालीन और ओपीडी का चक्कर काटते रहे। इस दौरान सभी डॉक्टर मंथली मीटिंग में व्यस्त थे। आखिर उपचार के अभाव में उसकी मौत हो गई।

तोरवा मुक्तिधाम के पास रहने वाले शेख इदरीस पिता शेख इस्माइल 55 साल पिछले कुछ दिनों से बीमार था। गुस्र्वार की दोपहर 12 बजे उसकी छाती में तेज दर्द होने लगा। परिजन उसे लेकर साढ़े बजे जिला अस्पताल पहुंचे। जहां ओपीडी पर्ची कटवाने के बाद डॉक्टर के चेंबर में पहुंचे तो पता चला कि डॉक्टर मंथली मीटिंग में है। इस समय ओपीडी में कोई भी डॉक्टर नहीं था।

मरीज की स्थिति देखकर लोगों ने कमरा नंबर 27 स्थित आपातकालीन जाने के लिए कहा। परिजन उसे स्ट्रेचर में लेकर आपातकालीन पहुंचे। यहां नर्स ने जानकारी दी कि कोई डॉक्टर नहीं है। इसके साथ ही ओपीडी के कमरा नंबर तीन में भेज दिया। वहां भी डॉक्टर नहीं मिला। परिजन इधर से उधर भटकते रहे। एक घंटे बाद दोपहर डेढ़ बजे मरीज की उपचार के अभाव में मौत हो गई। इसके बाद परिजन शव लेकर वापस लौट गए।


अन्य मरीज भी होते रहे परेशान

ओपीडी समय में बैठक आयोजित करने का खामियाजा सामान्य मरीजों को भी भुगतना पड़ा। मीटिंग दोपहर साढ़े 12 बजे से शुरू हुई थी। जबकि ओपीडी समय सुबह नौ से दोपहर दो बजे तक है।