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    मादा श्वान ने दूध पिलाकर बचाई बाघिन के शावक की जान

    Published: Wed, 14 Feb 2018 08:12 AM (IST) | Updated: Wed, 14 Feb 2018 11:30 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    बिलासपुर। कानन पेंडारी जू की बाघिन चेरी से जन्में मादा शावक की एक कुतिए ने जान बचा ली है। जन्म के चार दिन बाद ही शावक मां का दूध पीने में असमर्थ हो गई। साथ ही शारीरिक कमजोरी भी आने लगी। लिहाजा उसकी जान बचाने लेब्राडोर डॉग जिमी को किराए पर लिया गया। पहले भी इस तरह के प्रयोग कर चुके हैं।

    जिमी ने बड़ी सहजता के साथ शावक को स्वीकार कर लिया और मां की तरह दूध पिलाकर उसकी जान बचा दी। अब वह खतरे से बाहर है और प्रतिदिन 2 किग्रा चिकन भी चट कर जाती है।

    कानन पेंडारी जू में तीन महीने पहले 6 नवंबर को दो शावकों का जन्म हुआ। यह व्हाइट टाइगर विजय व बंगाल टाइग्रेस की संतान है। शावकों के जन्म को जू प्रबंधन ने पूरी तरह गोपनीय रखा था। इसकी वजह कहीं न कहीं सुरक्षा थी। लेकिन इस बार भी चिंता कम नहीं हुई।

    दरअसल जन्म के बाद मादा शावक मां का दूध नहीं पी पाई। इसे देखकर प्रबंधन परेशान हो गया। इसके चलते शावक का वजन दो से तीन दिन में 80 से 100 ग्राम कम हो गया। डिहाइड्रेशन होने लगी थी। ऐसे में उसे मां चेरी से अलग कर दिया गया और अस्पताल में चिकित्सक की निगरानी में लाकर रखा गया।

    साथ ही वह तकनीक अपनाई गई जिससे पूर्व में लायन प्रिंस व चेरी के ही शावकों को बचाने के लिए की गई थी। शहर के एक डॉग हैंडलर से संपर्क किया गया। इससे पहले भी जू को मदद मिली है। लिहाजा हेंडलर ने लेब्राडोर प्रजाति की डॉग जिमी को तीन महीने के लिए जू प्रबंधन को उपलब्ध कराया।

    डॉग की यह प्रजाति शांत रहती है। जिमी ने कानन में पहुंचते ही शावक को अपना बच्चा समझकर दूध पिलाने लगी। हालांकि एक जू कीपर को निगरानी में तैनात किया गया। वहीं डॉ. पीके चंदन हर घंटे मानिटरिंग कर रिपोर्ट लेने लगे। जू प्रबंधन की मेहनत रंग लाई। अब शावक को दूध की आवश्यकता नहीं है। वह चिकन का स्वाद चखती है।

    इसलिए आती है परेशानी

    कानन पेंडारी जू के चिकित्सक पीके चंदन ने बताया कि कभी - कमी दूध पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है। जो शावक चंचल स्वभाव का होता है वह आसानी से दूध पी जाता है। चेरी के शावकों के साथ भी यही हुआ। नर शावक जन्म के बाद से बेहद चंचल और तंदूरूस्त था। मादा कमजोर थी। इसके कारण उसे दूध पीते नहीं बन रहा था।

    45 से 60 दिन होती दूध की आवश्यकता

    बाघ के शावक 45 से 60 दिन ही दूध पीते हैं। इस अवधि के बाद वह चिकन, अंडा खाना शुरू कर देते हैं। दोनों शावकों ने भी दो महीने बाद ही दूध पीना छोड़ दिया है। चिकन खा रहे हैं। लेकिन इसकी निगरानी की जाती है। इस दौरान यह देखा जाता है कि कही आहार कम तो नहीं हो रहा है। यह निगरानी 6 महीने तक इसी तरह की जाएगी।

    तीन महीने बाद जारी की तस्वीर

    कानन पेंडारी जू प्रबंधन ने दोनों शावकों के स्वस्थ होने बाद पहली तस्वीर जारी की है। हालांकि इससे पहले शावकों के जन्म की पुष्टि हो चुकी थी। लेकिन वहां जाने की इजाजत किसी को नहीं थी। एक जूकीपर पर ही केज की सफाई, आहार देने की जवाबदारी थी। अभी भी एक शावक मां के साथ और दूसरे को अस्पताल में रखा गया है। इन्हें पर्यटकों को अभी नहीं दिखाया जाएगा। इसके लिए 15 से 20 दिन इंतजार करना पड़ेगा।

    फैक्ट फाइल

    नर शावक - 10 किग्रा वजन - उम्र तीन माह

    मादा शावक - 8 किग्रा वजन - उम्र तीन माह

    कानन में टाइगर की संख्या - 7

    - चेरी ने दो शावकों को जन्म दिया है। इनमें से मादा शावक को परेशानी आई थी। इसलिए उसे स्वान का दूध पिलाया गया। अब दोनों स्वस्थ हैं और मजे से चिकन का स्वाद चख रहे हैं। बुधवार से इन्हें पर्यटकों को दिखाने की योजना थी। लेकिन मौसम बदलने के कारण इस निर्णय को वापस ले लिया गया है। 15 से 20 दिन बाद पर्यटक नन्हें मेहमानों का दीदार कर सकेंगे। - सुनील कुमार बच्चन, प्रभारी, कानन पेंडारी जू

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