बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

ई-बैंकिंग का उपयोग करते हुए किसी भी तरह से व्यक्तिगत जानकारी देना खतरे से खाली नहीं है। कथित आर्मी ऑफिसर ने जेडी ऑटोनेशन के सेल्समैन को कॉल कर गाड़ी खरीदने का झांसा दिया और मोबाइल नंबर ले लिया। फिर गूगल पे खाते के जरिए एक लाख रुपये पार कर दिए। इस मामले की रिपोर्ट पर पुलिस ने धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर लिया है।

सिविल लाइन पुलिस के अनुसार जितेंद्र पांडेय पिता सरयू प्रसाद पांडेय तिफरा स्थित आर्या कॉलोनी में रहता है। वह जेडी ऑटोनेशन में काम करता है। एसबीआइ की सत्यम चौक शाखा में उनका अकाउंट है। बीते 11 मार्च को उनके मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने अपने आपको आर्मी आफिसर बताया। कथित आर्मी ऑफिसर ने बताया कि वह बार्डर में पदस्थ है और उसे चारपहिया गाड़ी खरीदनी है। गाड़ी बुकिंग करने के लिए उसने जितेंद्र से बैंक खाता नंबर मांगा, जिस पर उसने टाटा मोटर्स जेडी आटोनेशन का खाता नंबर दिया। इस बीच उसने झांसा देकर सेल्समैन जितेंद्र से गूगल पे खाता नंबर के साथ ही मोबाइल नंबर मांगा। मोबाइल नंबर देने के बाद उसके खाते से छह बार में एक लाख रुपये कट गए। मोबाइल में खाते से रकम निकाले जाने की सूचना मिलते ही वह परेशान हो गया। उसने इस मामले की सूचना बैंक के साथ ही थाने में दी। उसकी शिकायत पर पुलिस मामले की जांच करती रही। फिर धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया गया।

18 दिन बाद लिखी रिपोर्ट, फिर भी अनजान बने टीआइ

पीड़ित जितेंद्र पांडेय ने ठगी का शिकार होने के बाद तत्काल मामले की शिकायत सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई थी। लेकिन, आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के बजाए 18 दिन तक पुलिस इस मामले की जांच करती रही। फिर भी थानेदार को ठग ने किस तरीके से ऑनलाइन रकम गायब किया, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। टीआइ कलीम खान का कहना है कि अपराध दर्ज करने के बाद बैंक से जानकारी लेकर मामले की जांच की जाएगी। तब यह पता लगाया जाएगा कि रकम कैसे पार की गई है।