बिलासपुर(निप्र)। बिलासपुर वन परिक्षेत्र की टीम ने शनिवार को एक शिकारी को भरमार बंदूक, छर्रे समेत आधा दर्जन बटेर पक्षियों के साथ गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध कर उसे न्यायालय में पेश किया गया। जहां से उसे 15 दिन की रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पेंड्री निवासी फागू राम शिकारी खम्हरिया के पटेल कृषि फार्म हाऊस का चौकीदार है। शुक्रवार को वह किसी काम से बाहर गया था। उसने अपनी जगह बेटे मनोज कुमार को चौकीदारी करने के लिए कहा। पिता की गैरमौजूदगी का फायदा उठाते हुए बेटे ने फार्म हाउस में ही पक्षियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। साथ ही उसने पिता की लाइसेंसी बंदूक से पक्षियों पर निशाना साधने की कोशिश कर रहा था। तभी वहां से गुजर बिलासपुर रेलवे परिक्षेत्र के युवकों ने उसको देखा। बेजुबां पक्षियों के प्रति उसकी हरकत देखकर युवक चौकीदार के बेटे के पास गए। वहां उन्होंने देखा कि बंदूक के साथ आधा किलो छर्रे और 6 बटेर पक्षियों को मनोज बंधक बनाकर रखा है। युवकों ने बंदूक, छर्रे व पक्षी को छीनकर अपने कब्जे में लिया। उन्होंने इसकी सूचना नेचर क्लब के संयोजक मंसूर खान व प्रथमेश मिश्रा को दी। क्लब के सदस्यों ने इसकी सूचना तत्काल बिलासपुर वन परिक्षेत्र अधिकारी सुनील कुमार बच्चन को दी। सदस्यों की मदद से वन विभाग ने बंदूक, छर्रे व पक्षियों को लेकर परिक्षेत्र कार्यालय आए। शनिवार को चौकीदार के बेटे को पकड़ने की योजना बनाई गई। श्री बच्चन ने इसके लिए तीन सदस्यीय टीम बनाई। जिसमें डिप्टी रेंजर विजय साहू, वनरक्षक बहोरन कुमार व वनकर्मी चंद्रभान साहू शामिल थे। तीनों उसे जब्त बंदूक को लौटाने के लिए कानन पेंडारी जू के सामने बुलाए। शिकारी जैसे ही वहां पहुंचा, उसे परिक्षेत्र की टीम धरदबोचा। उसके खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 2 (16) ख ग , 39 (1), 3 (ख) 50, 51 (1,2) 2 (11) के अपराध पंजीबद्ध कर न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने उसे 15 दिन की रिमांड पर जेल भेज दिया है।

पक्षी भागे न, इसलिए कर दिया अपाहिज

मनोज शिकारी ने जिन पक्षियों को अपने कब्जे में लिया था, दरअसल सभी के पैर टूटे हुए थे। वह फरार न हो जाए, इसलिए बेजुबां पक्षियों के पैर को ही तोड़ दिया था। पक्षियों को तत्काल उपचार की आवश्यकता थी। इसलिए उन्हें कानन पेंडारी में छोड़ा गया।, जहां डॉ. पीके चंदन पक्षियों का उपचार कर रहे हैं।

लाइसेंसी है बंदूक

बताया जा रहा है कि चौकीदार फागूराम को 1992 में भरमार बंदूक का लाइसेंस तत्कालीन कोटा एसडीएम ने दिया था। वह अपनी आत्मरक्षा के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन लगाया था। उसे लाइसेंस भी मिल गया। इसके बाद से लगातार व लाइसेंस का नवीनीकरण भी करा रहा था,लेकिन उसका बेटा लाइसेंसी बंदूक का गलत प्रयोग करने का प्रयास करने के फिराक में था।