बिलासपुर। प्रदेश के जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों की संख्या और सुधार को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को चीफ जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी और जस्टिस संजय श्याम अग्रवाल की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि जेलों में बंदियों की संख्या क्षमता से बहुत ज्यादा है। इसके चलते बंदियों को रात के सोते समय करवट बदलते भी नहीं बनता । बुनियादी सुविधाओं के लिए प्रतिदिन मशक्कत करनी पड़ती है।

डिवीजन बेंच ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। बिलासपुर निवासी शिवराज सिंह ने अपने वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर जेल के भीतर बने बैरकों में नारकीय जीवन जी रहे बंदियों की स्थिति का खुलासा करते हुए जेल की आंतरिक व्यवस्था की पोल खोली थी।

उन्होंने याचिका में खुलासा किया है कि प्रदेश के अमूमन सभी जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों को रखा गया है। जेल प्रशासन द्वारा जेल मैनुअल के अलावा दिए गए मापदंडों का पालन भी नहीं किया जा रहा है।

बीते सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जेल के भीतर अतिरिक्त बैरक का निर्माण के अलावा शौचालय सहित अन्य सुविधाओं का विस्तार करने के निर्देश दिए थे।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने राज्य शासन ने पूर्व में दिए गए निर्देशों के परिपालन के संबंध में जानकारी मांगी व प्रदेश के जेलों में किए जा रहे विस्तार कार्य की जानकारी पेश करने कहा है।

अंबिकापुर जेल की हालत सबसे ज्यादा खराब : अंबिकापुर जिला जेल की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहां बंदियों की क्षमता एक हजार 20 है। यहां क्षमता से दुगुने से भी ज्यादा बंदियों को रखा गया है। जेल में बंदियों की भीड़ का आलम ये कि यहां दो हजार 378 बंदियों को रखा गया ह

बिलासपुर सेंट्रल जेल की क्षमता - 1300

बंदी- 2700

अंबिकापुर जेल की क्षमता - 1020

बंदी- 2378, बच्चों की संख्या - 220

रायगढ़ जेल की क्षमता - 705

बंदी- 524 व बच्चों की संख्या- 9