बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

अचानकमार टाइगर रिजर्व में लोरमी तहसीलदार द्वारा बीट गार्ड से गाली-गलौज करने और कोर जोन में शिकार करने की मंशा से घुसने के मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस मामले के जांच अधिकारी डीएफओ एस.बलगा गोलमोल जवाब दे रहे हैं। उन्हें यह नहीं पता कि इस मामले में जांच कौन कर रहा है, जांच रिपोर्ट किसे दी जाएगी और कार्रवाई कौन करेगा। फिर भी विश्वास के साथ कह रहे हैं कि कार्रवाई तो होगी। इससे साफ है कि पूरे मामले में पर्दा डालने की तैयारी शुरू हो गई है।

अचानकमार टाइगर रिजर्व में वन विभाग के कड़े प्रतिबंध हैं। आम लोगों को छोटी सी गलती के लिए भी इसके विपरीत परिणाम भुगतने पड़ते हैं। इसी टाइगर रिजर्व में तहसीलदार देर रात शराब पार्टी मनाकर लौट गए और उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामला उछलने के बाद अब वन विभाग लीपापोती में लग गया है। अब तक आरोपित तहसीलदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यहां तक कि वन अधिनियम के तहत मामला तक दर्ज करने की जरूरत वन अधिकारियों ने नहीं समझी। जबकि तहसीलदार के खिलाफ स्थानीय वन अमले ने बकायदा पंचनामा बनाकर फोटो समेत शिकायत भी की है। डीएफओ को मामले का जांच अधिकारी बताया गया। अब वे ही पूरे मामले से मुकर रहे हैं। डीएफओ को तो यह भी नहीं पता कि जांच कौन कर रहा है और जांच रिपोर्ट किसे दी जाएगी। इससे साफ है कि अब मामले को रफादफा कर दिया गया है। न जांच होनी है और न ही कोई कार्रवाई। खुद जांच अधिकारी ने पूरे मामले से अपना हाथ खींच लिया है। उल्लेखनीय है कि टाइगर रिजर्व के प्रतिबंध के कारण आम लोग अक्सर नियमों में फंस जाते हैं। वहीं जब प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी का मामला आया तो वन विभाग अपना हाथ खींचने में जुट गया है।

जांच कौन कर रहा है यह तो नहीं बता सकते, लेकिन संबंधित को रिपोर्ट दी जाएगी और कार्रवाई जरूर होगी। रिपोर्ट किसे जाएगी यह नहीं मालूम।

एस बलगा

डीएफओ, वन विभाग