बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन और जस्टिस गौतम भादुड़ी की डीबी ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व फारेस्ट का क्षेत्रफल कम किए जाने के खिलाफ पेश जनहित याचिका में शासन को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।

बस्तर के बीजापुर जिले में बाघ, वन भैंसा सहित अन्य वन्यजीव के संरक्षण और इनकी संख्या बढ़ाने के लिए वर्ष 1983 में इंद्रावती टाइगर रिजर्व फारेस्ट की स्थापना की गई थी। रिजर्व फारेस्ट के अंदर 85 गांवों की बसाहट है। इसका बफर जोन 1540 वर्ग किलोमीटर तथा कोर जोन 1250 वर्ग किलोमीटर है। सकल क्षेत्रफल 2800 वर्ग किलोमीटर है। राज्य शासन ने टाइगर रिजर्व के अंदर बसे गांव के विकास के लिए इसका क्षेत्रफल कम करने और इन गांवों को राजस्व ग्राम में शामिल करने केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था। एनटीसीए ने नए क्षेत्र को इसमें शामिल करने की अनुशंसा के साथ वन ग्राम को राजस्व ग्राम में शामिल करने की अनुशंसा की है। इसके साथ छत्तीसगढ़ शासन ने रिजर्व फारेस्ट का क्षेत्रफल कम करने कवायद शुरू की है। इसके खिलाफ बीजापुर निवासी लक्ष्मी चौहान एवं अशोक कुमार मिश्रा ने अधिवक्ता सुदीप अग्रवाल के माध्यम से हाईकोर्ट मे जनहित याचिका दाखिल की है। हाईकोर्ट ने याचिका में राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।