बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

हाईकोर्ट ने सीएजी रिपोर्ट मे गड़बड़ी उजागर होने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग को लेकर पेश जनहित याचिका में शासन को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है।

आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार मिश्रा ने सीएजी की रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश में विभिन्न कार्यों में गड़बड़ी उजागर होने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर किसी व्यक्ति को धन लाभ पहुंचाने और आपराधिक न्यास भंग करने के दोषी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है। इसमें कहा गया है कि राज्य में नवीनीकरण ऊर्जा संसाधन को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण का गठन किया गया। राज्य नोडल एजेंसी के रूप में वर्ष 2001 में किया गया। शासन ने नवीनीकरण क्रय नियम का पालन नहीं किया। इसके अलावा इस योजना के लिए पृथक निधि नहीं रखी गई। इसके कारण संस्थाओं को न्यूनतम 810.36 रुपए का अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसके अलावा आवंटित राशि से अधिक खर्च किया गया। इसी प्रकार संपूर्ण स्वच्छता अभियान में 258 शौचालय निर्माण होना दिखाया गया जबकि भौतिक सत्यापन के दौरान नहीं पाया गया है। निर्माण में निम्न गुणवत्ता, गलत उपयोग, अधिक भुगतान करने की अनियमितता की गई। इसके कारण बड़ी संख्या में हितग्राही शौचालय का उपयोग नहीं कर रहे हैं। याचिका में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा महालेखाकार विरुद्घ एस दोराई स्वामी के न्यायदृष्टांत को प्रस्तुत किया गया। इसके अनुसार भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक के जारी आदेश संविधान के अनुच्छेद 148 (5) के अंतर्गत कानून है। ऐसे में शासन का दायित्व बनता है कि भ्रष्टाचार से अवगत होने पर दोषियों के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई करे। इसके अलावा वित्तीय संहिता का नियम 25 में स्पष्ट उल्लेख है कि प्रत्येक शासकीय सेवक को पूर्णतः तथा स्पष्ट रूप से यह समझना चाहिए कि उसकी धोखाधड़ी या लापरवाही से शासन को कोई हानि होती है तो वह व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होगा। हाईकोर्ट की डीबी ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए राज्य शासन को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है।