बिलासपुर। कोच की सफाई के लिए अब यात्रियों को ऑनबोर्ड हाउस कीपिंग स्टॉफ को ढूंढने पूरी ट्रेन खंगालने की मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। यात्रियों की सहूलियत के लिए रेलवे बोर्ड ने ट्रेनों में सफाई स्टॉफ के लिए सीट निर्धारित कर दिया है। इससे अब स्टॉफ आसानी से नजर आ जाएगा। इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सभी जोनल मुख्यालय को फरमान जारी कर दिया गया है। ट्रेनों को साफ रखने के लिए ऑनबोर्ड हाउस कीपिंग स्टॉफ की सुविधा भी दी जा रही है। ज्यादातर ट्रेनों में स्टॉफ तैनात किए गए हैं।

यह यात्रियों की सहूलियत के लिए है। इसके जरिए यात्री चाहे तो जिस कोच में सफर कर रहे हैं उसकी सफाई करा सकते हैं। सफाई स्टॉफ दो तरह से मुहैया कराया जाता है। एक रेलवे खुद कराती है और दूसरी व्यवस्था के तहत ठेकेदार का स्टॉफ ट्रेन में तैनात किया जाता है। अभी तक हाउस कीपिंग स्टॉफ के लिए किसी भी ट्रेन में कोई जगह निर्धारित नहीं थी। ऐसे में 20 से 25 कोच तक चलने वाली ट्रेनों में स्टॉफ को ढूंढने के लिए यात्रियों को काफी मशक्कत करनी पड़ती थी।

टीटीई से शिकायत के बाद स्टॉफ को ढूंढने की जद्दोजहद करनी पड़ती थी। स्टॉफ नहीं मिलने की स्थिति में यात्रियों को गंदगी के बीच यात्रा करनी पड़ती थी और स्टेशन के आने का इंतजार करना पड़ता था। आए दिन कोच की गंदगी और कचरा नहीं उठने की शिकायतें भी मिलती थी। ज्यादातर यात्री सीधे रेलवे बोर्ड के हेल्पलाइन नंबरों पर शिकायतें दर्ज कराते थे। लगातार यात्रियों को आ रही इसी समस्या और उनकी दिक्कतों को देखते हुए ही बोर्ड ने एक अहम फैसला लिया है।

इसके तहत हाउस कीपिंग स्टॉफ के लिए ट्रेनों में सीट का निर्धारण कर दिया गया है। इसके तहत स्लीपर कोच के लिए ड्यूटीरत स्टॉफ एस-1 कोच के 71 और 72 नंबर बर्थ पर उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा एसी में बी-1 63-64 बर्थ को निर्धारित किया गया। सबसे छोटी कोच के अंतिम बर्थ का निर्धारण इसलिए किया गया, ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो और आसानी से वह उपलब्ध हो जाए। हालांकि बोर्ड ने अभी यह तय नहीं किया गया है कि इस नई व्यवस्था को कब से लागू करना है। यह जरूर है कि इसके लिए सभी जोन के जीएम को निर्देश दिए गए हैं।

चार्ट में भी रहेगी जानकारी

बोर्ड की इस नई व्यवस्था के तहत ऑनबोर्ड हाउस कीपिंग स्टॉफ की जानकारी आरक्षण चार्ट पर भी रहेगी। यात्रियों की तरह बकायदा स्टॉफ का नाम, किस कोच में ड्यूटी है आदि जानकारी दर्शाई जाएगी। इससे यात्रियों को ट्रेन के छूटने से पहले जानकारी मिल जाएगी। इसके बाद भी यदि स्टॉफ सफाई करने से अनाकानी करता है तो यात्री नामजात उसकी शिकायत रेलवे से कर सकते हैं।

एक महीने पहले रिजर्वेशन

सुर्कलर के अनुसार यदि ऑनबोर्ड हाउस कीपिंग स्टॉफ निजी है तो संबंधित ठेकेदार को एक महीने पहले ही स्टॉफ का रिजर्वेशन कराना होगा। हालांकि यह औपचारिकता केवल किराया जमा करने के लिए होगी, क्योंकि स्टॉफ को निर्धारित बर्थ ही मिलेगी। अभी तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। ठेके के समय ही किराया जुड़ा रहता था। रिजर्वेशन कराने से ठेकेदार पर भी शिकंजा कसा जा सकता है। रेलवे के पास यह आंकड़ा रहेगा कि वह कितने स्टॉफ को ट्रेन में भेज रहा है। पहले की व्यवस्था में अधिक स्टॉफ को ठेकेदार दर्शा देता था।

मैकेनिकल की जवाबदारी

हाउस कीपिंग स्टॉफ रेलवे का है तो यह अब इस व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी मैकेनिकल विभाग की है। कामर्शियल का किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं रहेगा। अभी तक मैकेनिकल व कमर्शियल दोनों स्टॉफ की ड्यूटी लगा देते थे। इसके कारण व्यवस्था बिगड़ जाती थी।