बिलासपुर। हाईकोर्ट ने किसी भी शासकीय कर्मचारी के निधन पर मृतक के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति व अन्य सहायता दिलाए जाने का दायित्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी की है। अधिकारी को आश्रितों को नियमों की जानकारी दी जानी चाहिए। कोर्ट ने मामले में याचिकाकर्ता के आवेदन को स्वीकार कर नियमानुसार अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया है।

याचिकाकर्ता डिगेश्वर प्रसाद के पिता विशेलाल बालोद में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान 1999 में उनका निधन हो गया। पिता के निधन के समय याचिकाकर्ता की उम्र नौ साल थी। मृतक सहायक शिक्षक के आश्रितों को विभाग की ओर से अनुकंपा नियुक्ति के नियम के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई।

याचिकाकर्ता डिगेश्वर बालिग होने पर शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने आवेदन पेश किया। विभाग ने शासकीय कर्मचारी के निधन होने के बाद तीन वर्ष के अंदर ही अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने का नियम होने का हवाला देते हुए आवेदन को निरस्त कर दिया।

याचिकाकर्ता ने शिक्षा सचिव को भी आवेदन दिया। शिक्षा सचिव द्वारा भी आवेदन निरस्त किए जाने पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इसमें कहा गया कि पिता का निधन होने के समय वह नाबालिग था। अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में उसे कोई जानकारी नहीं थी। इसके अलावा विभाग की ओर से भी उसकी मां को कुछ नहीं बताया गया। बालिग होने पर आवेदन दिया गया है।

याचिका में जस्टिस पी सेम कोशी के कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी शासकीय कर्मचारी का निधन होता है तो विभाग के वरिष्ठ अधिकारी का यह दायित्व है कि तीन माह के अंदर मृतक के आश्रित या उत्तराधिकारी को यह बताए कि अनुकंपा नियुक्ति कैसे मिलेगी। इसके अलावा मिलने वाले अन्य लाभ की भी जानकारी दी जानी चाहिए। याचिकाकर्ता के पिता का जब निधन हुआ तो वह अबोध बालक था।

विभाग की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई। याचिकाकर्ता अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने का हकदार है। कोर्ट ने शासन को याचिकाकर्ता के आवेदन पर नियमानुसार निर्णय लेते हुए अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया है।