कमलेश शर्मा, बिलासपुर नईदुनिया प्रतिनिधि। रेलवे में तीन से चार लाख रुपये लेकर पदोन्नति देने का खेल चल रहा है। अधिकारी दलालों के माध्यम से वसूली कर रहे हैं। इसे लेकर सबूत के साथ की गई शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं की गई। मामला सामने आने पर हाईकोर्ट ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक, सीबीआई रायपुर और पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को नोटिस जारी किया है।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में 2018 में विभागीय पदोन्नति परीक्षा से लोको निरीक्षक के 17, वाणिज्य निरीक्षक, सतर्कता निरीक्षक के रिक्त पदों को भरने अधिसूचना जारी की गई। इसके साथ अधिकारियों ने पदोन्नति के लिए तीन से चार लाख रुपये रेट तय कर दिया। वाणिज्य कर निरीक्षक एवं सतर्कता निरीक्षक के रिक्त पदों के लिए जनवरी में परीक्षा ली गई। वहीं लोको निरीक्षक के 17 पद के लिए 360 से अधिक चालकों के आवेदन करने पर 15 जनवरी से 18 मार्च तक प्रत्येक सोमवार को बिलासपुर में परीक्षा आयोजित की गई। पदोन्नति के लिए रेट तय किए जाने तथा दलालों के माध्यम से रिश्वत लिए जाने की सीबीआइ से शिकायत की गई।

सीबीआई ने शिकायतकर्ता को साक्ष्य लाने के निर्देश दिया। इस पर शिकायतकर्ता ने फोन से नागपुर के एक दलाल से बात की। दलाल ने कहा कि लोको निरीक्षक बनाना है, तो तीन से चार लाख रुपये लगेंगे। हामी भरने पर दलाल ने उससे थोड़ी देर में फोन करने की बात कही। कुछ देर बाद दलाल ने स्वयं फोन कर कहा साहब से तुम्हारे संबंध में बात हो गई है। तुम उनके घर चले जाओ। साहब से पैसे के बारे में बात नहीं करना। दलाल के कहने पर शिकायतकर्ता अधिकारी के बंगले गया। अधिकारी ने चर्चा के बाद कहा ठीक है, तुम्हारा काम हो जाएगा। साक्ष्य मिलने के बाद सीबीआइ ने प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की। प्रदेश में सीबीआइ पर रोक के कारण अधिकारियों ने जनवरी में कार्रवाई की अनुमति प्रदान करने मुख्य सचिव को आवेदन पेश किया।

शासन से अनुमति नहीं मिलने पर सीबीआइ ने पांच मार्च को पुनः स्मरण पत्र दिया। दूसरी ओर से कार्रवाई नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने सीबीआई से पुनः संपर्क किया। इस पर सीबीआइ ने शासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण कार्रवाई करने से इन्कार कर दिया। सीबीआइ के हाथ खड़े करने पर शिकायतकर्ता ने पूरे साक्ष्य के साथ रेलवे के सतर्कता अधिकारी से शिकायत की। सतर्कता अधिकारी ने नकद लेनदेन का मामला होने के कारण कार्रवाई से इन्कार कर दिया। किसी भी स्तर में कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा।

पत्र में रेलवे में हमेशा से विभागीय पदोन्नति परीक्षा में भ्रष्टाचार होने की बात कही गई। शिकायतकर्ता ने कोर्ट को समस्त साक्ष्य पेश किए। कार्यवाहक चीफ जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने रिमार्क के साथ शिकायत को हाईकोर्ट रजिस्ट्री के जनहित सेल को भेजा था। जनहित सेल के अतिरिक्त रजिस्ट्रार संतोष कुमार तिवारी ने शिकायत के अध्ययन में इसे जनहित का मामला माना है। उन्होंने दो अप्रैल को पुलिस अधीक्षक बिलासपुर, पुलिस अधीक्षक सीबीआइ रायपुर, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक को नोटिस जारी कर शिकायत पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। हाईकोर्ट की इस नोटिस के बाद रेल अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

एसीबी ने भी किया मना

सीबीआइ को कार्रवाई की अनुमति नहीं मिलने पर शिकायतकर्ता ने एसीबी के एसपी से भी शिकायत की थी। एसीबी ने मामला केन्द्रीय संस्थान का होने के कारण कार्रवाई करने से इन्कार कर दिया। कहीं से न्याय नहीं मिलने पर उसने हाईकोर्ट में शिकायत की है।

सालों से जमे हैं भ्रष्टाचारी

रेलवे में तबादला, प्रमोशन व पोस्टिंग में लेनदेन करने वाले अधिकारी पिछले कई साल से बिलासपुर में ही जमे हैं। रेलवे सेवा नियम के अनुसार किसी भी अधिकारी को एक ही जगह में तीन वर्ष से अधिक समय तक नहीं रखा जाना है। उनका बाहर तबादला किया जाना है। इस नियम के बावजूद कुछ अधिकारी पिछले 15 वर्ष से बिलासपुर में ही पदस्थ हैं। समय समय पर उनका पद बदला जाता है, किन्तु बिलासपुर से बाहर ट्रांसफर नहीं किया जा रहा है।