बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जोनल स्टेशन का आरआरआइ केबिन बहुत आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाकिंग सिस्टम से आपरेट होगा। 30 साल पुराने इस केबिन की समय अवधि समाप्त हो गई है। पांच साल पहले ही इसे आधुनिक सिस्टम से लैस हो जाना चाहिए था। लेकिन विभागीय अड़चनों की वजह से तय समय पर काम शुरू नहीं हो सका। अब जाकर रेल प्रशासन ने इसकी तरफ नजर डाली है। प्रथम चरण में टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई।

किसी भी आरआरआइ केबिन की अवधि 25 साल होती है। इस लिहाज से बिलासपुर का केबिन समय से पांच साल ज्यादा चल चुका है। यहां के सारे उपकरण कमजोर और जर्जर हो चुके हैं। इसके अलावा यहां के सिस्टम पुराने होने के कारण एक केबल में खराबी आने से परिचालन ठप हो जाता है। आरआरआइ यानि रूट रिले रूम केबिन ट्रेनों के परिचालन का प्रमुख केंद्र है। यहीं से दिशा व समय तय होती है। बिलासपुर केबल रेलवे स्टेशन के सभी प्लेटफार्म के अलावा बिलासपुर, गतौरा, जयरामनगर, उसलापुर, तारबाहर यार्ड, चुचुहियापारा यार्ड की लाइन तक बिछे हुए हैं। इनकी मदद से परिचालन होता है। इसी के सहारे ट्रेनों की लाइन भी बदली जाती है। दो मंजिला बिल्डिंग के ऊपर मानिटर के साथ कर्मचारियों की ड्यूटी और प्रथम तल में भारी तादात में उपकरण और केबल का जाल बिछा हुआ है। लेकिन यह सभी पुराने हो चुके हैं। इतना ही नहीं रूट रिले इंटरलाकिंग सिस्टम पुरानी तकनीक है। जिसे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाकिंग सिस्टम से बदला जा रहा है। बतातें कि समय सीमा समाप्त होने के कारण रेलवे ने इसका जीर्णोद्धार करने रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजा था। इसकी महत्ता को समझते हुए बोर्ड ने करीब 60 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृती दी। वर्ष 2015-2016 में राशि स्वीकृत होने के बाद कार्य शुरू हो जाना चाहिए था। अब जाकर रेलवे ने सजग हुई है।

पूरी तरह वातानुकूलित होगा

इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की वजह से उपकरणों के गरम होने व इसमें आग लगने जैसी घटनाओं का खतरा रहता है। यही वजह है कि केबिन के अंदर का तापमान ठंडा रखने के लिए इसे पूरी तरह वातानूकुलित बनाया जाएगा। इसके आवश्यकतानुसार एसी लगाने का भी रेलवे बोर्ड का आदेश है। मालूम हो कि भोपाल इटारसी के आरआरआइ केबिन में आग लगने की घटना होने से तीन महीने तक रेल परिचालन प्रभावित हुआ था। इससे रेलवे को करोड़ों का नुकसान भी हुआ।

वित्तीय वर्ष में हो जाएगा पूरा

रेलवे के अनुसार नए आरआरआइ की शुरुआत इस वर्ष होगी और साल के अंत तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य भी रखा जाएगा। इसकी संभावना भी है, क्योंकि टेंडर हो चुका है।

ये होंगे फायदे

0 संकेत की विफलताओं में कमी

0 समयबद्धता में सुधार

0 परिचालन क्षमता में वृद्धि

0 लाइन निर्माण के दौरान बदलाव आसान

0 अधिक सुरक्षित परिचालन

0 ऊर्जा संरक्षण