बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

देश के कई क्षेत्रों में रोटा वायरस सक्रिय हैं, जो खासतौर से छोटे बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है। इसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जुलाई में सभी अस्पताओं व स्कूलों में बच्चों को रोटा वायरस का टीका लगाने का निर्णय लिया है।

रोटा वायरस की चपेट में आने से बच्चा अत्याधिक दस्त, शरीर में पानी की कमी, तेज बुखार से ग्रसित हो जाता है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर इसके गंभीर परिणाम आ सकते हैं। वहीं अन्य प्रदेशों में लगातार इनके पीड़ित मिलने से स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। प्रदेश स्तर पर नौ माह से पांच साल के बच्चों को रोटा वायरस का टीका लगाने का निर्णय लिया गया है। यह टीकाकरण जुलाई से शुरू होगा। इसमें हर मंगलवार और शुक्रवार को विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों के साथ ही स्कूलों में टीका लगाया जाएगा।

शिशु संरक्षण माह 21 से

शिशु संरक्षण सप्ताह 21 जून से शुरू होगा। 19 जुलाई तक चलने वाले कार्यक्रम में पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए और आयरन का सिरप पिलाया जाएगा। साथ ही जिलेभर में अतिकुपोषित बच्चों को खोजकर उन्हें एनआरसी में भर्ती कराया जाएगा। यह कार्यक्रम भी हर मंगलवार और शुक्रवार को आयोजित होगा।

क्या है रोटा वायरस

बच्चों व नवजात शिशुओं को होने वाले डायरिया की मुख्य वजह रोटा वायरस है। इसकी वजह से होने वाला संक्रमण बेहद कष्टकारी है। इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। यह विकासशील देशों में शिशुओं की मौत का प्रमुख कारण है। इसका उपचार निर्जलीकरण को रोककर किया जाता है।