बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

रेलवे में एक बार फिर आरपीएफ स्टाफ की कमी के चलते ट्रेनों की स्कार्टिंग प्रभावित हो गई है। अभी हालत है यह कि पिछले कुछ दिनों से जांच पूरी तरह बंद है। स्कार्टिंग के लिए आरपीएफ के पास जवान नहीं हैं। करीब आठ से 10 जवानों की चुनाव ड्यूटी लगा दी गई है। वहीं करीब 12 से 15 अवकाश पर हैं। बचे जवान 23 बीट पर ड्यूटी में तैनात हैं।

ट्रेनों में स्कार्टिंग की कमान आरपीएफ संभालती है। जीआरपी में स्टाफ की इतनी कमी है कि कभी-कभी ही सर्चिंग के लिए भेजा जाता है। अब आरपीएफ की स्कार्टिंग बंद होने से ट्रेनें और इसमें सफर करने वाले यात्री पूरी तरह असुरक्षित हो गए हैं। जबकि 20 से 24 कोच की इन ट्रेनों हजारों की संख्या में यात्री भारी भरकम लगेज के साथ यात्रा करते हैं। इसी भीड़ का फायदा उठाकर अपराधी बड़ी आसानी से अपराध कर रफूचक्कर हो जाते हैं। नियमित सर्चिंग होने से अपराध नियंत्रण पर रहता है और अपराधी चाहकर भी घटना को अंजाम देने से कतराते हैं। स्थिति संवेदनशील होने के बाद भी स्टाफ की कमी के चलते अचानक स्कार्टिंग बंद करने से अपराध होने की आशंका बढ़ गई है। खासकर ऐसी ट्रेनें जो रात में गुजरती हैं। बिलासपुर से आरपीएफ के जवानों की ड्यूटी इन्हीं ट्रेनों में ज्यादा लगाई जाती है। अभी तक का आंकड़ा बताता है कि प्रतिदिन सात से आठ ट्रेनों में स्कार्टिंग कराई जाती है। यह स्थिति जाने की होगी। वहीं वापसी में दूसरी ट्रेनों में स्कार्टिंग करते मुख्यालय तक लौटते हैं। लेकिन अभी एक भी ट्रेन ऐसी नहीं है कि जिनमें आरपीएफ के जवान तैनात रहते हैं। मालूम हो कि बिलासपुर में आरपीएफ ने 23 बीट बनाया है। जिनमें प्लेटफार्म के अलावा कोचिंग डिपो, बीसीएन डिपो समेत अन्य जगह शामिल हैं। यहां वे रेल सपंत्ति के सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं। इसके लिए 24 घंटे में लगभग 45 से 50 स्टाफ की आवश्यकता पड़ती है। आरपीएफ में जो ड्यूटी रोस्टर तैयार किया गया है उसके अनुसार तीन शिफ्ट में आठ - आठ घंटे ड्यूटी करनी है। ट्रेन स्कार्टिंग के साथ- साथ सुरक्षा की यह जिम्मेदारी भी बेहद महत्वपूर्ण है। लिहाजा अब स्कार्टिंग की शुरुआत अब जवानों की आंध्रप्रदेश से चुनाव ड्यूटी व अवकाश से लौटने के बाद शुरू होगी।

वर्दी में कैमरा लगाकर की ड्यूटी

गुरुवार से आरपीएफ के जवानों ने वर्दी में कैमरा लगाकर ड्यूटी की। हालांकि इसकी शुरुआत बुधवार से हो जानी चाहिए थी। लेकिन कैमरों की बैटरी के कारण चाहकर भी कैमरा लगाकर जवान जांच नहीं कर पाए। पहले ही दिन कैमरे में बैटरी तुरंत डिस्चार्ज होने की शिकायत आ रही थी। दूसरे दिन गुरुवार को सुबह से बैटरियां चार्ज की गई। इसके बाद दोपहर दो बजे के शिफ्ट में पहुंचने वाले जवानों को कैमरे दिए गए। ट्रेन स्कार्टिंग नहीं होने के कारण प्लेटफार्म में तैनात स्टाफ ही कैमरा लगाकर ड्यूटी कर रहा है। स्कार्टिंग शुरू होते ही इन्हें कैमरे दिए जाएंगे।