बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

शहर से लगे सकरी क्षेत्र के भरनी स्थित सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर में जवानों के आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में यहां अफसरों की प्रताड़ना की बात कही जा रही है। जिस तरीके से सोमवार की सुबह असिस्टेंट प्लाटून कमांडर ने आत्मघाती कदम उठाया है, उसे देखकर साथी जवान भी सहम गए। सच्चाई सामने न आ जाए, इसलिए हर बार मामले को दबाने के लिए लीपापोती कर देते हैं।

पुष्पेंद्र बहादुर सिंह पिता श्रवण सिंह (50) बटालियन में एएसआइ (असिस्टेंट प्लाटून कमांडर ) के पद पर कार्यरत थे। संतरी ड्यूटी पर तैनात आरक्षक अभय तिवारी नीचे था। वहीं पुष्पेंद्र सिंह ऊपर सर्चिंग टॉवर में थे। अचानक ऊपर से फायरिंग की आवाज सुनकर वह दौड़ते हुए ऊपर गया। तब तक एएसआइ खून से लथपथ होकर नीचे पड़े थे। मृतक के भतीजे विजेंद्र सिंह समेत परिजन को भरोसा ही नहीं हो रहा है कि सीधे, सरल व सहज व्यक्तित्व के पुष्पेंद्र सिंह ने इस तरह से कदम उठाया होगा। उनके बड़े भाई मनेंद्रगढ़ में रहते हैं। यही वजह है कि पुष्पेंद्र ने अपने सर्विस रिकार्ड में मनेंद्रगढ़ का पता दिया था। यहां उनका भतीजा विजेंद्र सिंह दिनशॉ में काम करता है। उसने बताया कि एक दिन पहले ही चाचा पुष्पेंद्र सिंह से बात हुई थी। तब वे एकदम सामान्य थे और किसी तरह का कोई तनाव नहीं था। लेकिन, रातभर में ऐसा क्या हुआ कि उन्हें आत्महत्या करनी पड़ी। जब उन्होंने अपनी बड़ी बेटी की शादी की, तब काफी खुश थे। उनके मन में कभी आत्महत्या करने जैसे ख्याल भी नहीं आया था। लेकिन, उन्होंने कैसे और किन परिस्थितियों में यह कदम उठाया यह जांच का विषय है। सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर में वर्ष 2013-2014 में भी एक आरक्षक ने खुद पर गोली मार ली थी। उसकी आत्महत्या को सीआरपीएफ के अफसरों ने महज हादसा बताकर रफादफा कर दिया था। जबकि, उस समय भी प्रताड़ना की बात सामने आई थी। लेकिन, पुलिस की जांच में भी मामले को दबा दिया गया। अब एएसआइ पुष्पेंद्र सिंह की आत्महत्या के बाद फिर से वहीं स्थिति बन गई है।

देर से दी सूचना

आत्महत्या की खबर मिलते ही सीआरपी गु्रप सेंटर में हड़कंप मच गया। सूत्र बताते हैं कि घटना करीब छह बजे की है। लेकिन, अफसरों ने इस घटना की सूचना पुलिस को काफी विलंब से दी। बताया जा रहा है कि ग्रुप सेंटर के अफसरों ने पहले उसकी तलाशी ली। उन्हें डर था कि कहीं एएसआइ ने सुसाइड नोट तो नहीं लिखा है। पूरी तलाशी लेने के बाद इस घटना की जानकारी लेने के बाद सकरी पुलिस को सूचना दी गई। विलंब से सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस अफसर भी हैरान थे।

पहले थी परेशानी, अब नहीं

मृतक के परिजन ने बताया कि पुष्पेंद्र सिंह वर्ष 1988-89 में सीआरपीएफ में आरक्षक के पद से अपनी सेवाएं शुरू की थी। वह हमेशा कड़ी मेहनत व लगन से काम करता था। हमेशा ड्यूटी के प्रति ईमानदार था। नौकरी के कारण वह परिवार को ज्यादा समय नहीं दे पाता था। पत्नी की मौत के बाद वे काफी निराश थे और बेटियों को लेकर चिंतित रहते थे। लेकिन, धीरे-धीरे उनकी स्थिति सामान्य हो गई। बेटी की शादी से अवकाश से लौटने के बाद हर दो-चार दिन में वह भतीजे वीजेंद्र से बातचीत करता था।